प्रेरणा की लौ: एक हौसला बढ़ाने वाली ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित यह ग़ज़ल आपको जीवन की हर चुनौती का सामना करने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

Sunday, August 23, 2026
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प्रेरणा की लौ: एक हौसला बढ़ाने वाली ग़ज़ल
“प्रेरणा की लौ: एक हौसला बढ़ाने वाली ग़ज़ल”
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23 August 2026
प्रेरणा की लौ: एक हौसला बढ़ाने वाली ग़ज़ल
Ghazal
राहों में गर काँटे बिखरे, तू हौसला कर संभल चल। मंज़िल की चाहत दिल में हो, हर मुश्किल से निकल चल। क्यों बैठा है मायूस सा, ये वक़्त नहीं मचल चल। सूरज की किरणें बुलाती हैं, तू रोशनी में बदल चल। तूफानों से डरना कैसा, जब साथ है तेरा अचल चल। ख़ुद को पहचान, अपनी शक्ति से, हर बाधा को कुचल चल। जो बीत गया वो सपना था, अब नया सवेरा बदल चल। 'फ़ुरक़ान' कहता है ये तुझसे, बस आगे ही आगे निकल चल।
Kaafiya संभल, निकल, मचल, बदल, अचल, कुचल Radeef चल
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
हर सुबह एक नई किरण है, तू हिम्मत अपनी दिखा जा। गर गिर भी जाए राह में कभी, फिर उठ खड़ा हो, निभा जा। ज़ंजीरें जो बाँधें तुझको, उन्हें तोड़ कर तू छुड़ा जा। आज़ादी का परचम लहरा दे, दुनिया को रास्ता सिखा जा। अंधेरों से डरना कैसा, तू ख़ुद को दीपक बना जा। हर दिल में जगा दे उम्मीदें, हर सोच को तू जगा जा। जो सोया है तुझमें हुनर, उसे 'फ़ुरक़ान' दिखा जा। जीत का सफ़र है ये तेरा, बस मंज़िल तक तू चला जा।
Kaafiya दिखा, निभा, छुड़ा, सिखा, बना, जगा, चला Radeef जा
F Poetry ByFurkan S Khan

प्रेरणा की लौ

Ghazal By Furkan S Khan

Kaafiya: संभल, निकल, मचल, बदल, अचल, कुचल

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News Desk
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