बहराइच बुलडोज़र ऐक्शन के विरुद्ध APCR की याचिका: 18 नवंबर 2024 को बहराइच बुलडोज़र ऐक्शन के विरुद्ध APCR द्वारा दाखिल याचिका में महत्वपूर्ण अपडेट

बहराइच बुलडोज़र ऐक्शन के खिलाफ़ 18 नवम्बर 2024 को सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) द्वारा दाखिल याचिका में सरकारी वकील ने बताया कि सरकार ने ध्वस्तीकरण के लिए जारी की गई नोटिस को वापस ले लिया है। इस याचिका में बहराइच हिंसा से जुड़े आरोपियों के घरों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की आलोचना की गई थी।

सरकार ने उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए यह जानकारी दी कि ध्वस्तीकरण की नोटिस अब वापस ले ली गई है। इसके बाद अदालत ने याचिका दाखिल करने वाली संस्था के अधिवक्ता से यह पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जनहित याचिका का क्या औचित्य है।

याचिका दाखिल करने वाली संस्था ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार सरकार ने संप्रदाय विशेष के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की, जिसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए। अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 27 नवंबर की तारीख तय की है।

मुख्य बिंदु:

  • सरकार ने उच्च न्यायालय में बताया कि ध्वस्तीकरण की नोटिस वापस ले ली गई है।
  • APCR संस्था ने सरकार के इस कदम को संप्रदाय विशेष के खिलाफ बदले की भावना से जोड़ा।
  • अदालत ने याचिका दाखिल करने वाली संस्था से जनहित याचिका के औचित्य पर सवाल किया।
  • मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2024 को होगी।

अदालत के सवाल:

  • क्या क्षेत्र में ध्वस्तीकरण से पहले सर्वे किया गया था?
  • क्या उन 23 घरों के अलावा अन्य जगहों पर अतिक्रमण की स्थिति है?
  • क्या नोटिस जारी करने के दौरान उचित समय दिया गया था?

क्या है ध्वस्तीकरण का मुद्दा?

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को लेकर यह विवाद बहराइच हिंसा से जुड़े आरोपियों के घरों पर की गई थी। इन घरों पर नोटिस चस्पा की गई थी, जिसे लेकर एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने जनहित याचिका दाखिल की थी। संस्था का कहना था कि यह कार्रवाई संप्रदाय विशेष के खिलाफ बदले की भावना से की गई, और इसे न्यायिक जांच के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह सवाल उठता है कि जनहित याचिका का औचित्य क्या है, जबकि सरकार ने ध्वस्तीकरण नोटिस वापस ले ली है। अदालत ने याचिका दाखिल करने वाली संस्था से इस सवाल का जवाब मांगा।

अंतिम विचार

यह मामला बहराइच में हुए हिंसा के बाद की गई ध्वस्तीकरण कार्रवाई से जुड़ा हुआ है। अदालत में अब यह तय किया जाएगा कि इस तरह की कार्रवाई सरकार ने संप्रदाय विशेष के खिलाफ बदले की भावना से की थी या नहीं। 27 नवंबर को इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें इन सवालों पर विचार किया जाएगा।