बीते कुछ दिनों से मैं अपने गांव फखरपुर में एक दिलचस्प तस्वीर देख रहा हूं। हर तीसरा बच्चा नेता बना घूम रहा है। किसी को अपनी पार्टी सबसे अच्छी लगती है, तो कोई दूसरी पार्टी के समर्थकों पर तंज कसने में लगा है। सोशल मीडिया हो या आपसी बातचीत, हर तरफ राजनीतिक बहस, एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश और अपनी-अपनी पार्टी के समर्थन में दलीलें देखने को मिल रही हैं।

उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति के बीच युवाओं की राजनीतिक दिलचस्पी होना अच्छी बात है। लोकतंत्र में हर किसी को अपनी पसंद की पार्टी का समर्थन करने और अपनी राय रखने का अधिकार है। लेकिन सवाल यह है कि क्या राजनीति का मतलब सिर्फ अपनी पार्टी का झंडा उठाना, दूसरों पर तंज कसना और सोशल मीडिया पर खुद को बड़ा राजनीतिक जानकार साबित करना रह गया है?

जरा सोचिए, आपके नेता बनने से समाज का कितना विकास हो रहा है?

आपके किसी पार्टी का समर्थक बनने या किसी नेता के साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देने से न तो कौम की तरक्की होने वाली है और न ही आपकी अपनी जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव आने वाला है। राजनीति में दिलचस्पी रखिए, राजनीतिक मुद्दों को समझिए और अपनी पसंद की पार्टी का समर्थन भी कीजिए, लेकिन इतना जरूर समझिए कि किसी पार्टी का समर्थक होना और समाज के लिए काम करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

आज हमारे समाज को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो शिक्षा, रोजगार, कारोबार, सामाजिक जागरूकता और आपसी एकता पर बात करें। ऐसे युवा जो अपने गांव की समस्याओं को समझें, लोगों की आवाज बनें और जरूरत पड़ने पर जिम्मेदार लोगों से सवाल पूछ सकें। सिर्फ सोशल मीडिया पर बहस करने से समस्याएं हल नहीं होतीं, उनके लिए जमीन पर उतरकर काम करना पड़ता है।

हमारे समाज में पहले भी ऐसे कई लोग हुए हैं जिन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई, अपनी बात मजबूती से रखी और वक्त के साथ आगे बढ़े। लेकिन पहचान सिर्फ किसी नेता के साथ खड़े होने से नहीं बनती। पहचान अपने काम, अपने व्यवहार और अपने विचारों से बनती है।

याद रखिए, नेता की तस्वीर के साथ सेल्फी पोस्ट करना नेतागिरी नहीं है।

असली नेतृत्व तब दिखाई देता है जब लोग आपकी बात सुनना चाहें, आपकी राय को अहमियत दें और आपकी मौजूदगी से उन्हें किसी समस्या का समाधान नजर आए। ऐसा मुकाम हासिल करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, लोगों के बीच रहना पड़ता है और अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती है।

एक और बात समझने की जरूरत है। अपनी पसंद की पार्टी का समर्थन करने के लिए दूसरी पार्टी के समर्थकों को गाली देना, उनके परिवार या उनकी पहचान पर टिप्पणी करना और उन्हें नीचा दिखाना किसी भी तरह की समझदारी नहीं है। आज आप किसी के खिलाफ बोल रहे हैं, कल हो सकता है कि वही व्यक्ति आपके साथ किसी सामाजिक काम में खड़ा हो। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन गांव के रिश्ते, आपसी सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारियां अपनी जगह हैं।

हो सकता है कि लोग आपके सामने आपकी बातों का जवाब न दें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे आपकी हरकतों को पसंद भी करते हैं। इसलिए अपनी जुबान और व्यवहार पर नियंत्रण रखना सीखिए। मजबूत विचार रखने का मतलब दूसरों का अपमान करना नहीं होता।

मैं यह नहीं कह रहा कि युवा राजनीति से दूर रहें। बल्कि युवाओं को राजनीति में जरूर आना चाहिए, लेकिन पहले राजनीति को समझना चाहिए। अपने अधिकारों को जानना चाहिए, अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि जिन नेताओं का वे समर्थन कर रहे हैं, वे शिक्षा, रोजगार, विकास और आम लोगों के मुद्दों पर क्या काम कर रहे हैं।

किसी पार्टी के प्रति वफादारी से पहले अपने समाज और अपने भविष्य के प्रति जिम्मेदारी को समझिए।

आपको किसी नेता का समर्थक बनने से कोई नहीं रोक रहा, लेकिन अपनी पूरी पहचान किसी पार्टी तक सीमित मत कर दीजिए। अपनी सोच विकसित कीजिए, अपनी काबिलियत बढ़ाइए और ऐसा काम कीजिए कि लोग आपको किसी नेता का समर्थक होने की वजह से नहीं, बल्कि आपके अपने काम की वजह से पहचानें।

फखरपुर के युवाओं से मेरी यही अपील है कि राजनीति पर चर्चा जरूर करें, लेकिन एक-दूसरे के दुश्मन न बनें। अपनी ऊर्जा गाली-गलौज और तंज कसने में बर्बाद करने के बजाय शिक्षा, रोजगार, कारोबार और अपने गांव की बेहतरी में लगाएं।

क्योंकि समाज को हर तीसरे घर में एक राजनीतिक समर्थक नहीं, बल्कि हर घर में एक जागरूक, शिक्षित और जिम्मेदार इंसान चाहिए।

यह मेरी व्यक्तिगत राय है। आप सहमत हों या असहमत, अपनी बात जरूर रखिए, लेकिन तर्क और सम्मान के साथ।