अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद, ईरान ने मध्य पूर्व में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है, जिससे बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन सहित कई अरब देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव: ईरान का अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों के जवाब में, ईरान ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई की है। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। यह हमला 28 फरवरी, 2026 को हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ 'बड़े सैन्य अभियान' की घोषणा की थी, जिसे 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है।
किन देशों में हुए मिसाइल हमले?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने बहरीन, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन और सऊदी अरब में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में मिसाइलें दागीं। इन देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए और कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया।
बहरीन और कतर की स्थिति
बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट (Fifth Fleet) बेस के मुख्यालय को मिसाइल से निशाना बनाया गया, जिसके आसपास धमाकों की आवाजें सुनी गईं और धुएं के गुबार उठते देखे गए। वहीं, कतर के अल-उदीद एयर बेस, जो अमेरिका का मध्य पूर्व में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है, को भी निशाना बनाया गया। कतर के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि दोहा के आसमान में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को सफलतापूर्वक रोककर नष्ट कर दिया गया, जो अल उदीद एयर बेस की ओर बढ़ रही थी। जून 2025 में भी अल-उदीद एयर बेस पर हमले की रिपोर्टें थीं, जिससे एक संचार डोम को नुकसान पहुँचा था।
कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अलर्ट
कुवैत में मिसाइल खतरे के बाद एयरस्पेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। यहां कैंप आरिफजान और अली अल सलेम वायु सेना अड्डा जैसे अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी स्थित अल धाफरा एयर बेस को भी निशाना बनाया गया। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने उच्च दक्षता के साथ इंटरसेप्ट किया। हालांकि, अबू धाबी के एक रिहायशी इलाके में मिसाइल के मलबे के गिरने से संपत्ति को नुकसान पहुंचा और एक एशियाई मूल के व्यक्ति की मौत हो गई।
सऊदी अरब और जॉर्डन की स्थिति
सऊदी अरब पर किसी बड़े सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। रियाद के पास प्रिंस सुल्तान वायु सेना अड्डे पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया था। जॉर्डन में भी एयर सायरन बजाए गए और सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। जॉर्डन की सेना ने देश को निशाना बनाकर दागी गई दो मिसाइलों को मार गिराने की सूचना दी है।
ईरान ने हमला क्यों किया?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह हमला सीधे अरब देशों पर नहीं बल्कि उन देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लक्ष्य बनाकर किया गया। ईरान का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा उसके सैन्य एवं रणनीतिक ठिकानों, जिसमें परमाणु सुविधाएं भी शामिल थीं, पर किए गए हमलों के जवाब में यह कार्रवाई की गई। ईरान के पास मध्य पूर्व में बैलिस्टिक मिसाइलों का सबसे बड़ा और सबसे विविध भंडार है, जिसकी मारक क्षमता 2000 किमी तक है और यह इज़राइल तक पहुँचने में सक्षम है।
पूरे मध्य पूर्व में बढ़ा खतरा
स्थिति को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गई हैं और तेल बाजार में भी अस्थिरता देखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र सहित दुनिया के कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 'हथियार डालने या मौत का सामना करने' की धमकी दी है। इज़राइल ने अपने सैन्य अभियान को 'रोरिंग लॉयन' नाम दिया है।
मौजूदा हालात ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को दर्शाते हैं, जिसका प्रभाव पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र पर पड़ रहा है। आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है, जिससे वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए खतरा पैदा हो गया है।