ग्राम पंचायत बैराकाजी के ग्रामीणों ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक, बहराइच को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया कि विपक्षी द्वारा बार-बार झूठी और मनगढ़ंत शिकायतें दर्ज करायी जा रही हैं, जिससे उनकी सामाजिक और मानसिक शांति प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने मामले में निष्पक्ष जांच व इलाके से अवैध कब्जा हटाने की मांग भी की है।

घटना का विवरण

स्थानीय लोगों ने बताया कि विपक्षी सफ़ीउल्ला, तुफैल, खलील अहमद व रफी अहमद अन्य लोगों द्वारा लगातार अलग-अलग प्रार्थना पत्र उच्च अधिकारियों को भेज कर फर्जी मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं। हाल ही में प्रोसीडिंग के तहत संख्या 0248/2025 और संदर्भ पत्र संख्या 20018025023349 से एक मुक़दमा पंजीकृत किया जा चुका है।

ग्रामीणों के अनुसार, जब यूनियन/बोर्ड (जैसे उत्तर प्रदेश सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड) ने कब्जा खाली कराने के पत्र जारी किए, तभी से स्थानीय विरोधियों द्वारा दबाव बनाकर लगातार शिकायतें दी जा रही हैं। इन्होंने कहा कि इससे उनका मानसिक व सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

स्थलिय सत्यापन और अधिकारी प्रतिक्रिया

पत्र की स्थलीय जांच के लिये नायब तहसीलदार, हल्का लेखपाल और पुलिस प्रशासन ने सत्यापन किया, जिस दौरान विपक्षियों पर अवैध कब्जा पाए जाने की सूचना मिली। ग्रामीणों का दावा है कि मौके पर जब कब्जा पाया गया, तभी से विपक्षियों की ओर से प्रतिशोध स्वरूप झूठी शिकायतें शुरू हो गईं।

ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच व अवैध कब्जा हटाने की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों की मांगे और समिति

  • फर्जी शिकायतों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच
  • जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
  • अवैध कब्जे को हटाया जाना और जमीन/संपत्ति का सत्यापन
  • ग्रामीणों के मानसिक व सामाजिक नुकसान की बढ़ती स्थिति का संज्ञान

किसने सौंपा पत्र — प्रमुख उपस्थित लोग

पत्र सौंपने के दौरान निम्नलिखित प्रमुख ग्रामीण मौजूद थे: अब्दुल खालिक, इमरान अहमद, मंजूर अहमद, मोहम्मद माजिद, अलीम मौलाना, समाल अहमद, मंसूर अहमद, फारूक अहमद, अफज़ाल सहित अन्य ग्रामीण प्रतिनिधि।

पृष्ठभूमि और कानूनी संदर्भ

किसी भी संपत्ति विवाद में स्थानीय वक्फ बोर्ड, तहसील और जिला प्रशासन की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। यदि कब्जा वक्फ संपत्ति पर पाया गया है, तो बोर्ड द्वारा जारी आदेशों के अनुसार कब्जा खाली कराया जा सकता है — लेकिन स्थानीय विवादों में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है ताकि किसी भी पक्ष की संपत्ति व सम्मान सुरक्षित रहे।

स्थानीय असर और विश्लेषण

ग्रामीणों ने बताया कि लगातार शिकायतों की वजह से वे मानसिक तनाव व सामाजिक कलह का सामना कर रहे हैं। ऐसे मामलों में ताज़ा और निष्पक्ष जांच न होने पर सामाजिक तनाव बढ़ने का खतरा रहता है — इसलिए प्रशासनिक सेंटरों को जल्द और निष्पक्ष कदम उठाना आवश्यक है।

अगला कदम (What to watch)

  1. पुलिस प्रशासन द्वारा दर्ज शिकायतों का खुलासा और मामले की फ़ोरेंसिक/स्थल निरीक्षण रिपोर्ट
  2. यदि आवश्यक हो तो तहसीलदार/जिला मजिस्ट्रेट द्वारा आदेश और कब्जा संबंधित कागजात सार्वजनिक किए जाने की घोषणा
  3. ग्रामीणों और विपक्षी तर्कों का सार्वजनिक रिकॉर्ड—जिससे भविष्य में शटलिंग रोकी जा सके

रिपोर्टिंग सुझाव या दस्तावेज़ भेजने के लिए: info@vews.in