मध्य पूर्व संकट के बीच भारतीय एयरलाइंस को मिलेगी राहत, कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ के कोष को दी मंज़ूरी
पश्चिम एशिया में जारी अशांति के बीच भारतीय एयरलाइंस को राहत देने के लिए कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ के कोष को हरी झंडी दे दी है।
Key Highlights
- केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय एयरलाइंस को सहारा देने के लिए ₹10,000 करोड़ के एक विशेष कोष को मंज़ूरी दी है।
- यह पहल एयरलाइंस के बढ़ते परिचालन लागत, विशेषकर ईंधन और बीमा प्रीमियम से निपटने में मदद करेगी।
- इस फंड का उद्देश्य हवाई किराए पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ने वाले प्रभाव को कम करना और यात्रा को किफायती बनाए रखना है।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में लगातार गहराते संकट ने वैश्विक व्यापार और यात्रा को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसी बीच, भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश की एयरलाइंस कंपनियों को इस संकट के दुष्परिणामों से बचाने के लिए ₹10,000 करोड़ के एक बड़े कोष को मंज़ूरी दे दी है। इस फैसले का सीधा मकसद भारतीय विमानन क्षेत्र को स्थिरता प्रदान करना और यात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना है। कैबिनेट ने बुधवार को इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई, जो ऐसे समय में आया है जब एयरलाइंस कंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों, बीमा प्रीमियम और लंबे मार्गों के कारण भारी दबाव में हैं।
क्यों पड़ी इस कोष की ज़रूरत?
पश्चिम एशिया का क्षेत्र वैश्विक विमानन मार्ग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां की अशांति, विशेषकर हाल ही में बढ़े तनाव ने कई हवाई क्षेत्रों को जोखिम भरा बना दिया है। इसका नतीजा यह हुआ है कि एयरलाइंस को अब लंबे और महंगे वैकल्पिक मार्गों से उड़ान भरनी पड़ रही है। इन लंबे मार्गों से न सिर्फ ईंधन की खपत बढ़ती है, बल्कि उड़ान का समय भी अधिक लगता है, जिससे परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके अलावा, युद्ध-ग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने वाली उड़ानों के लिए बीमा प्रीमियम भी आसमान छू रहे हैं। इन सभी कारकों का सीधा असर एयरलाइंस की लाभप्रदता और अंततः हवाई किराए पर पड़ रहा है।
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