पश्चिमी एशिया में भूचाल: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों ने 21,000 करोड़ रुपये निकाले

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मचा दी है, और इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिख रहा है। बीते कुछ दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से भारी निकासी की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से कुल ₹21,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाल ली है। इस भारी निकासी ने भारतीय शेयर बाजार में खासी खलबली मचा दी है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

क्या है इस निकासी की मुख्य वजह?

इस बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी के पीछे की मुख्य वजह पश्चिमी एशिया में ईरान और इजरायल के बीच गहराता संघर्ष है। ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक अक्सर जोखिम भरी परिसंपत्तियों, जैसे उभरते बाजारों की इक्विटी, से पैसा निकालकर सोने, अमेरिकी डॉलर या सरकारी बॉन्ड जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं।

यह स्थिति बताती है कि वैश्विक घटनाओं का स्थानीय बाजारों पर कितना गहरा प्रभाव हो सकता है। जब अनिश्चितता बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक अक्सर 'निकासी' (flight to safety) की नीति अपनाते हैं, जिससे उन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़ता है जहां से पूंजी निकाली जा रही है।

भारतीय बाजार पर प्रभाव और आगे की राह

विदेशी पूंजी की इस निकासी ने भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखी गई है, जिससे निवेशकों को नुकसान का सामना करना पड़ा है। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती और घरेलू निवेशकों का विश्वास कुछ हद तक इस दबाव को झेलने में मदद कर रहा है। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) इस दौरान बाजार में खरीदारी कर रहे हैं, जिससे विदेशी निकासी के प्रभाव को कुछ हद तक संतुलित किया जा रहा है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक विदेशी पूंजी का प्रवाह अस्थिर बना रह सकता है। हालांकि, भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद, स्थिर सरकार और बढ़ते घरेलू उपभोग को देखते हुए दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह बाजार अभी भी आकर्षक बना हुआ है। आने वाले दिनों में वैश्विक स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यही भारतीय शेयर बाजार की आगे की दिशा तय करेगा।