एलपीजी सिलेंडर ₹60 महंगा: आम आदमी पर महंगाई का डबल अटैक, अब ₹913 में मिलेगा घरेलू गैस!
देश के आम आदमी को एक बार फिर महंगाई का तगड़ा झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। इस वृद्धि के बाद, राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब ₹913 में मिलेगा। यह वृद्धि तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है, जिससे घरों का बजट बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
लंबे समय से वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारत में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है। मौजूदा जियोपॉलिटिकल तनाव, विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एलपीजी की कीमतों में यह वृद्धि इन्हीं वैश्विक कारकों का परिणाम है, जो उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा बोझ डाल रही है।
बढ़ती कीमतों का आम गृहिणी पर असर
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की यह बढ़ोतरी उन लाखों परिवारों के लिए चिंता का विषय है जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस पर निर्भर हैं। पहले से ही पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे आम आदमी को अब रसोई गैस के मोर्चे पर भी झटका लगा है। यह वृद्धि सीधे तौर पर घरेलू बजट को प्रभावित करेगी और परिवारों को अपने खर्चों को फिर से समायोजित करने के लिए मजबूर करेगी। खास तौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह एक बड़ी चुनौती होगी।
वाणिज्यिक सिलेंडर भी हुआ महंगा
घरेलू एलपीजी के साथ-साथ, वाणिज्यिक (कॉमर्शियल) एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। जानकारी के अनुसार, वाणिज्यिक सिलेंडर ₹115 तक महंगा हो गया है। इस वृद्धि का असर होटल, रेस्तरां और अन्य छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा, जिससे खाद्य पदार्थों और सेवाओं की लागत बढ़ सकती है। अंततः, इसका बोझ भी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा, क्योंकि व्यवसायी बढ़ी हुई लागत को उत्पादों की कीमतों में समायोजित करेंगे।
आगे क्या?
सरकार और तेल कंपनियों की ओर से कीमतों की समीक्षा मासिक आधार पर की जाती है। वैश्विक बाजार की अस्थिरता को देखते हुए, निकट भविष्य में राहत मिलने की संभावना कम ही दिख रही है। ऐसे में आम जनता को फिलहाल बढ़ती महंगाई का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा। यह मूल्य वृद्धि देश की आर्थिक स्थिरता और उपभोक्ता विश्वास के लिए भी एक चुनौती पेश करती है।