उत्तर प्रदेश के जनपद बहराइच के अंतर्गत आने वाला फ़ख़रपुर गाँव आज गहरी समस्याओं से जूझ रहा है।
यहाँ बेरोज़गारी चरम पर है, युवाओं में नशे की लत बढ़ती जा रही है, शिक्षा व्यवस्था लगभग ठप है और विकास के नाम पर कोई ठोस पहल नज़र नहीं आती।
गाँव की गलियों और मोहल्लों में स्वयं को “नेता” कहलाने वालों की भरमार है — विशेषकर मुस्लिम समाज में। इनका मुख्य काम केवल चुनाव में प्रधान पद के लिए पर्चा भरना, जगह-जगह बैनर लगवाना, और लोगों को तुच्छ वस्तुएँ बाँटकर स्वयं को “समाजसेवी” कहलाना है।
जब कोई इन खोखले दावों और दिखावे की राजनीति के विरुद्ध आवाज़ उठाता है — जैसे कि फ़ुरक़ान एस. ख़ान — तो कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप के माध्यम से अभद्र भाषा और गालियों का सहारा लेते हैं।