Key Highlights

  • लाखों हज यात्रियों ने अराफात में दुआएं पूरी कीं, हज का अहम चरण संपन्न।
  • यात्री अब मुजदलिफा में खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं, कंकड़ जमा कर रहे हैं।
  • अगले चरण में यात्री मीना जाएंगे, 'शैतान को पत्थर मारने' की रस्म अदा करेंगे।

अराफात के बाद मुजदलिफा में लाखों हज यात्री: अगले पड़ाव की तैयारी

लाखों की संख्या में हज यात्रियों ने अराफात के मैदान में अपना महत्वपूर्ण 'वुकुफ' यानी ठहराव पूरा कर लिया है। इस अहम रस्म के बाद, सभी तीर्थयात्री मुजदलिफा की ओर बढ़ चुके हैं, जहां उन्होंने खुले आसमान के नीचे रात गुज़ारी। यह हज की सबसे पवित्र और आध्यात्मिक यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है। यात्री अब शैतान को पत्थर मारने की रस्म ('रमी') के लिए कंकड़ जमा कर रहे हैं, जो अगले चरण में अदा की जाएगी।

अराफात दिवस का महत्व: हज का आध्यात्मिक चरम

अराफात का दिन हज यात्रा का सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। इस दिन, लाखों मुस्लिम तीर्थयात्री अराफात के मैदान में इकट्ठा होते हैं, जहां वे सूर्योदय से सूर्यास्त तक दुआएं करते हैं और अल्लाह से अपने पापों की माफी मांगते हैं। पैगंबर मोहम्मद ने इसी स्थान पर अपना आखिरी उपदेश दिया था। यह दिन आत्म-चिंतन, प्रार्थना और ईश्वर से करीब होने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। अराफात में ठहरना हज का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसके बिना हज अधूरा माना जाता है।

मुजदलिफा: कंकड़ जमा करने का पड़ाव

अराफात से निकलने के बाद, हज यात्री मुजदलिफा की यात्रा करते हैं। यह एक खुला मैदान है, जो अराफात और मीना के बीच स्थित है। यहां यात्री सूर्यास्त के बाद पहुंचते हैं और रातभर खुले आसमान के नीचे रहते हैं। मुजदलिफा में रहते हुए, वे शैतान को पत्थर मारने की रस्म के लिए छोटे-छोटे कंकड़ जमा करते हैं। यह रस्म हज के अगले चरण में मीना में अदा की जाती है। मुजदलिफा में रात बिताना भी हज के महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है, जो इबादत और धैर्य का प्रतीक है।

मीना की ओर प्रस्थान और रमी का अनुष्ठान

मुजदलिफा में रात गुजारने के बाद, हज यात्री फज्र (सुबह) की नमाज के बाद मीना के लिए प्रस्थान करते हैं। मीना पहुंचने पर, वे 'जमरात' नामक तीन स्तंभों पर पत्थर फेंकने की रस्म अदा करते हैं, जिसे 'रमी' कहा जाता है। यह प्रतीकात्मक रूप से शैतान को त्यागने और बुराई को दूर भगाने का प्रतिनिधित्व करता है। रमी की यह रस्म ईद-उल-अजहा के पहले दिन से शुरू होकर अगले दो-तीन दिनों तक चलती है। इसके बाद, कुर्बानी का अनुष्ठान होता है और पुरुष अपने सिर मुंडवाते हैं या बाल छोटे करवाते हैं, जबकि महिलाएं बालों का एक छोटा हिस्सा कटवाती हैं।

लाखों की भीड़ का कुशल प्रबंधन और सुरक्षा

सऊदी अरब सरकार ने हज यात्रियों की विशाल संख्या को देखते हुए व्यापक प्रबंध किए हैं। अराफात, मुजदलिफा और मीना के बीच तीर्थयात्रियों की सुगम आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष परिवहन व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा के भी पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। इस विशाल और पवित्र यात्रा में, यात्री न केवल धार्मिक कर्तव्य निभाते हैं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव से भी गुजरते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्म-शुद्धि और ईश्वर के करीब आने का एक मार्ग है, जैसा कि कई संस्कृतियों में ‘तीर्थ’ शब्द से भी परिलक्षित होता है, जो स्वयं एक पवित्र यात्रा का प्रतीक है। तीर्थ नाम का अर्थ, उत्पत्ति और व्यक्तित्व जैसी जानकारियां ऐसी ही गहन आध्यात्मिक खोजों से जुड़ी हैं। प्रशासन की चौकसी और सहयोग से यह यात्रा सफलतापूर्वक जारी है।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

  • हज में अराफात दिवस का क्या महत्व है?

    अराफात दिवस हज यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इस दिन, हज यात्री अराफात के मैदान में प्रार्थना करते हैं और अल्लाह से माफी मांगते हैं, जिसे हज का आध्यात्मिक चरम बिंदु माना जाता है। इसके बिना हज अधूरा रहता है।

  • मुजदलिफा में हज यात्री क्या करते हैं?

    अराफात से निकलने के बाद, हज यात्री मुजदलिफा में रात बिताते हैं। यहां वे खुले आसमान के नीचे आराम करते हैं और शैतान को पत्थर मारने की रस्म (रमी) के लिए छोटे कंकड़ जमा करते हैं, जो मीना में अदा की जाती है।

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