यह शायरी खोए हुए प्यार और पुरानी यादों के दर्द को बयां करती है। कवि अपनी प्रेमिका की यादों में खोया हुआ है, जहाँ सब कुछ धुँधला सा लगता है, फिर भी उन वादों की उम्मीद बाकी है। [अक्स|छाया/प्रतिबिंब]
यह शायरी जुदाई के बाद दुनिया के बेरौनक लगने का एहसास कराती है। कवि के लिए सब कुछ अजनबी हो गया है, और अपने भी पराये लगने लगे हैं। [वीरानियों|सूनेपन/खालीपन]