उड़ान की चाह

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: बढ़ाए, मुस्कुराए, सजाए  |  Radeef: जा
मंज़िलें मिलेंगी ज़रूर, बस कदम बढ़ाए जा, राह में आए चाहे जितनी भी बाधा, तू मुस्कुराए जा। हौसलों की उड़ान से, आसमाँ भी झुकेगा एक दिन, अपने सपनों को तू, हर पल सजाए जा।

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: पुकारता, संवरता, चलता  |  Radeef: है
उठो, जागो, बढ़ो आगे, ये वक्त पुकारता है, हर मुश्किल से लड़कर ही, इंसान संवरता है। न डरना कभी हार से, ये तो बस एक पड़ाव है, सफलता उसी को मिलती है, जो निरंतर चलता है।

Shayari — By Furkan S Khan

Kaafiya: उड़ता, गढ़ता, बदलता  |  Radeef: चल
हौसलों की उड़ान भर, तू ऊँचा उड़ता चल, हर चुनौती को पार कर, अपनी राह गढ़ता चल। ये दुनिया तेरी मुट्ठी में है, बस हिम्मत न हारना तू, अपने सपनों को हकीकत में, हर पल बदलता चल।