उठो, बढ़ो, जीतो!
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: राहों, चाहों | Radeef: में
मंज़िलें पुकारती हैं, तू सुन ले सदा,
हिम्मत की लौ जला, अंधेरों में चला।
जो रुका, वो झुका, जो बढ़ा, वो पाया,
सफलता की राहों, में हर खुशी पा।
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: रात, बात | Radeef: है
भटक न जाना तू, राहों में गुमनाम,
हर मुश्किल का हल, तेरे ही नाम।
अंधेरों से उजाले की ओर, यही तेरी जात है,
हर पल नया सवेरा, हर पल जीत की बात है।
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: ऊँची, सच्ची | Radeef: है
मत डर तू तूफानों से, ये तो आते-जाते हैं,
तेरी हिम्मत के आगे, ये सब छिप जाते हैं।
सपनों की उड़ान, हमेशा ऊँची, सच्ची है,
मेहनत का फल मीठा, यही दुनिया की रची है।