इश्क़ की रौशनी
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: जलती, ढलती, मिलती, पलती, रवानी, निशानी, कहानी, पुकारती | Radeef: है
इश्क़ की रौशनी जब दिल में जलती है,
हर ज़ुल्मत, हर ग़म की चादर ढलती है।
ये वो एहसास है जो रूह से मिलती है,
हर साँस में इक नई जीवनी पलती है।
कभी मीठी सी धुन, कभी गहरी रवानी है,
इश्क़ की हर अदा इक अनमोल निशानी है।
ये नज़्म नहीं, ये तो धड़कनों की कहानी है,
जो हर पल, हर लम्हा, बस तुझको पुकारती है।
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: हसीं, ज़मीं, दिलनशीं, यक़ीं, सुनाती, मनाती, भुलाती, सिखाती | Radeef: है
मोहब्बत का सफ़र, कितना हसीं है,
हर राह में मिलता, इक नया ज़मीं है।
कभी धूप, कभी छाँव, ये दिलनशीं है,
ये ज़िंदगी का सबसे, प्यारा यक़ीं है।
ख़ामोश लबों पर, ये नग़्मा सुनाती है,
रूठी हुई रूह को, फिर से मनाती है।
ये हर दर्द को, हँसकर भुलाती है,
मोहब्बत ही तो है, जो जीना सिखाती है।