जीवन की राह
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: राह, चाह, निगाह, पनाह, गवाह, निबाह | Radeef: है
ये ज़िंदगी एक अनोखी सी राह है,
हर मोड़ पर एक नई सी चाह है।
कभी आह है, कभी वाह का आलम है,
हर पल में उसकी एक नई निगाह है।
जो गिरकर उठा, वही तो चला है,
ये तो बस हिम्मतों की पनाह है।
नादानियों से भरी है ये दुनिया,
यहाँ हर किसी को कुछ गवाह है।
'फ़ुरकान' कहते हैं, ये खेल है रब का,
जिसे खेलना है, वही तो निबाह है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: आती, कहलाती, लहराती, मिटाती, निभाती | Radeef: जाती है
ये ज़िंदगी है क्या, बस यूँ ही आती जाती है,
कभी हँसाती है, कभी रुलाती जाती है।
हर मोड़ पर एक नई कहानी कहलाती है,
कभी ख़ुशी की लहर, कभी ग़म लहराती जाती है।
जो आज है, वो कल शायद ना रहे यहाँ पर,
हर उम्मीद एक नई राह दिखाती जाती है।
ग़मों को भूलो, खुशियों को गले लगाओ,
ये तो सब कुछ पल में मिटाती जाती है।
'फ़ुरकान' कहते हैं, यही रीत है दुनिया की,
हर रिश्ता अपना फ़र्ज़ निभाती जाती है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: वही, कहीं, नहीं, यहीं, सभी, कभी | Radeef: सही है
जो ज़िंदगी ने दिया है, वो सब सही है,
हर फ़ैसला उसका, बस वही सही है।
कभी ख़ुशी मिली, कभी ग़म मिला,
जो भी हुआ है, वो सब कहीं सही है।
शिकायतें ना कर, ये वक़्त का खेल है,
जो आज है, वो कल शायद नहीं सही है।
हर पल को जियो, हर लम्हे को अपनाओ,
खुशियाँ मिलेंगी तुम्हें, बस यहीं सही है।
'फ़ुरकान' कहते हैं, ये दुनिया फ़ानी है,
जो चला गया, वो लौटा कभी नहीं सही है।