सफ़र: यात्रा; ख़बर: समाचार; पाँव: पैर; छाँव: छाया। यह नाज़्म जीवन को एक यात्रा के रूप में दर्शाती है, जहाँ हर मोड़ पर नए अनुभव मिलते हैं, कभी सुख के तो कभी दुख के।

आईना: दर्पण; कोना: पहलू/पहचान। यह नाज़्म जीवन को एक आईने के समान मानती है, जो हर पल अपने रंग बदलता है और हमें हँसी-खुशी व दुख के विभिन्न पहलुओं से रूबरू कराता है।

चक्र: पहिया/गति; यूँ ही: ऐसे ही। यह नाज़्म समय के निरंतर चलने वाले चक्र और जीवन में आने वाले सुख-दुख के उतार-चढ़ावों को दर्शाती है, जहाँ हर पल एक नई कहानी कहता है।