राहों का सफ़र

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: दिखाती, जगाती  |  Radeef: है
हर सुबह एक नई राह हमें दिखाती है, हर चुनौती एक नया सबक सिखाती है। न डरो तुम कभी अंधेरी रातों से, हर रात के बाद रोशनी जगमगाती है। जो गिरता है, वही तो फिर उठता है, हर हार के बाद जीत की आस आती है। तेरी हिम्मत ही तेरी सच्ची पहचान है, जो हर दिल में नई उम्मीद जगाती है। न थकना कभी, न रुकना कभी राह में, ये ज़िंदगी हर पल नए रंग दिखाती है। अपने सपनों को दे तू ऊँची परवाज़, ये दुनिया तेरी राह तकती जाती है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बुलाती, बढ़ाता  |  Radeef: है
उठ, चल, अब मंज़िल तुझे बुलाती है, हर कदम पर एक नई राह दिखाती है। न रुकना कभी, न थकना कभी, ऐ हमसफ़र, तेरी हिम्मत ही तो दुनिया को बताती है। जो डर गया, वो कभी जीत नहीं पाया, जिसने लड़ा, वही इतिहास रचता है। अपने अंदर की शक्ति को पहचान तू, तेरा हौसला ही तो तुझे आगे बढ़ाता है। न सोच कि तू अकेला है इस राह पर, हर सितारा तेरी रोशनी बढ़ाता है। बस तू अपनी धुन में चलता चला जा, तेरा नाम खुद ब खुद जगमगाता है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: लाती, सजाती  |  Radeef: है
हर सुबह एक नई किरण लाती है, जो हर दिल में उम्मीद जगाती है। न डरो तुम कभी अंधेरों से, हर मुश्किल एक सबक सिखाती है। जो गिरता है, वही तो फिर उठता है, हर हार के बाद जीत की आस आती है। तेरी हिम्मत ही तेरी सच्ची पहचान है, जो हर दिल में नई रौशनी सजाती है। न थकना कभी, न रुकना कभी राह में, ये ज़िंदगी हर पल नए रंग दिखाती है। अपने सपनों को दे तू ऊँची परवाज़, ये दुनिया तेरी राह तकती जाती है।