प्रेम की राह

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: कहीं, मिटती, सही, यहीं, जलाती, बुझती, मिलती, रुकती, हारती, टूटती, झुकती  |  Radeef: नहीं
ये प्रेम है, जो दिल में बसता है कहीं, इसकी धुन रूह की मिटती नहीं। हर साँस में इसका एहसास है सही, इसके बिना ज़िंदगी अधूरी है यहीं। ये वो आग है, जो जलाती नहीं, ये वो प्यास है, जो बुझती नहीं। ये वो मंज़िल है, जो मिलती नहीं, ये वो राह है, जो रुकती नहीं। ये ज़िद है, जो कभी हारती नहीं, ये वो आस है, जो टूटती नहीं। ये वो आसमाँ है, जो झुकती नहीं, ये प्रेम की कहानी, कभी रुकती नहीं।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: गहराई, सच्चाई, इंतहा, खुदाई, शिकायत, इनायत, रिवायत, आयत, चमक, दमक, महक, दहक  |  Radeef: क्या
इश्क़ का समंदर है, जिसकी गहराई क्या, हर लहर में एक कहानी, उसमें सच्चाई क्या। ये वो सफ़र है, जिसकी कोई इंतहा भी क्या, इसमें खो जाने में ही, असली ख़ुदाई है क्या। न कोई शिकवा इसमें, न कोई शिकायत, बस एक मीठी सी चाहत, एक बेपनाह इनायत। ये दिल की हर धड़कन में, है उसकी रिवायत, इश्क़ ही तो है, रूह की सबसे बड़ी आयत। ये चाँदनी रात है, ये तारों की चमक, ये हर सुबह का सूरज, ये हर शाम की दमक। हर एक लम्हे में है, उसके होने की महक, इश्क़ ही तो है, जीवन की सबसे पावन दहक।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: बुझता, टूटता, रुकता, छूटता, ज़माना, अफ़साना, तराना, ठिकाना, रवानी, कहानी, निशानी, ज़ुबानी  |  Radeef: नहीं
प्रेम वो उजाला है, जो कभी बुझता नहीं, ये वो सपना है, जो कभी टूटता नहीं। ये वो रास्ता है, जिस पर कोई रुकता नहीं, ये वो एहसास है, जो दिल से छूटता नहीं। न कोई मौसम बदले, न कोई ज़माना, प्रेम की धुन पे चलता है हर अफ़साना। ये वो बारिश है, जिसमें भीग जाए हर तराना, प्रेम ही तो है, हर दिल का एक ठिकाना। ये हर धड़कन में है, हर साँस की रवानी, ये हर आँखों में है, एक मीठी कहानी। ये हर लब पे है, एक ख़ामोश निशानी, प्रेम ही तो है, ज़िंदगी की असल ज़ुबानी।