उदासी का बसेरा
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: बसेरा, अंधेरा, पहरा, गहरा | Radeef: है
दिल में मेरे अब बस उदासी का बसेरा है,
हर लम्हा सूना, हर तरफ अंधेरा है।
आँखों में नमी है, लबों पे ख़ामोशी का पहरा है,
क्या कहूँ, ये दर्द कितना गहरा है।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: सताती, रुलाती, तड़पाती | Radeef: हैं
गुज़री हुई यादें, अब भी सताती हैं,
हर रात मुझे तन्हाई में रुलाती हैं।
क्या करूँ इस दिल का, जो तुझे भूल नहीं पाता,
तेरी बातें मुझे पल पल तड़पाती हैं।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: नमी, थमी, रमी | Radeef: सी है
लबों पे हँसी है, आँखों में नमी सी है,
ये ज़िंदगी क्यों इतनी थमी सी है।
शिकवा नहीं किसी से, बस ख़ुद से गिला है,
हर साँस में अब एक उदासी रमी सी है।