उदासी के लम्हे
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: आँखों, साँसों | Radeef: में
हर लम्हा तेरी यादों का, अब बोझ सा लगता है,
ज़िंदगी का हर पल, तन्हाईओं में कटता है।
वो हँसी, वो बातें, सब कुछ धुँधला गया है,
आँखों में आँसू, और दिल में दर्द बसता है।
साँसों में तेरी खुशबू, अब भी महसूस होती है,
पर तू नहीं है पास, यह हकीकत चुभती है।
ये वक़्त भी गुज़र जाएगा, कहते हैं सब मुझको,
पर कैसे समझाऊँ, ये दिल कब मानता है।
हर आहट पे चौंक उठना, तेरा इंतज़ार करना,
ये कैसी बेकरारी है, जो चैन से न रहने देता है।