रियाद: संयुक्त राष्ट्र के फाइनेंशियल ट्रैकिंग सर्विस (UN FTS) की ताजा रिपोर्ट ने एक बार फिर सऊदी अरब को वैश्विक स्तर पर मानवता की सेवा में अग्रणी साबित किया है। 2025 में सऊदी अरब ने मानवीय सहायता में विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर पहुंचकर इतिहास रच दिया है। अरब दुनिया में तो यह पहला स्थान रहा ही, साथ ही यमन को दी गई सहायता में 49.3% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा दानकर्ता बना रहा।

मुख्य बिंदु: सऊदी अरब 2025 में कुल मिलाकर दूसरे सबसे बड़े मानवीय दानदाता के रूप में उभरा, केवल अमेरिका के बाद। अरब राष्ट्रों में नंबर-1 और यमन-सहायता में सर्वोच्च।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में क्या कुछ खास है?

संयुक्त राष्ट्र की फाइनेंशियल ट्रैकिंग सर्विस ने 2025 के आंकड़ों को जारी करते हुए सऊदी अरब को गैर-सदस्य दानदाता देशों में दूसरे स्थान पर रखा है। कुल 48 दानदाता देशों (सदस्य और गैर-सदस्य) में यह 10वें स्थान पर है, लेकिन मानवीय सहायता के क्षेत्र में इसकी उपलब्धि असाधारण मानी जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार:

  • यमन को कुल मानवीय सहायता का 49.3% हिस्सा सऊदी अरब से आया
  • सीरिया को दी गई सहायता में दूसरे नंबर पर स्थान
  • किंग सलमान ह्यूमैनिटेरियन एड एंड रिलीफ सेंटर (KSrelief) के माध्यम से त्वरित और प्रभावी सहायता वितरण

KSrelief और सऊदी नेतृत्व की भूमिका

KSrelief के महानिदेशक डॉ. अब्दुल्लाह अल-रबीआह ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:

"यह रैंकिंग सऊदी अरब की उदारता, मानव गरिमा की रक्षा और वैश्विक जिम्मेदारी के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। हम दुनिया भर में जरूरतमंदों की मदद के लिए एक स्थायी स्रोत बने रहेंगे।"

यह सब कुछ किंग सलमान बिन अब्दुलअजीज और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के दृष्टिकोण और विजन 2030 के तहत हो रहा है, जिसमें मानवीय सहायता को राष्ट्रीय प्राथमिकता का दर्जा दिया गया है।

विश्व स्तर पर सऊदी अरब की छवि में बदलाव

पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब की इमेज में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां तेल और अर्थव्यवस्था की बात होती थी, अब लोग इसकी मानवीय पहल की चर्चा करते हैं। सोशल मीडिया पर लाखों लोग इस खबर को शेयर कर रहे हैं और कई पश्चिमी मुस्लिम यूजर्स ने लिखा है कि "यह वह सऊदी अरब है जिसे दुनिया को जानना चाहिए"।

गल्फ देशों (सऊदी अरब, कतर और UAE) की संयुक्त सहायता 2025 में अमेरिका से भी अधिक रही, भले ही अमेरिकी अर्थव्यवस्था इनकी तुलना में कई गुना बड़ी हो। यह तथ्य सऊदी अरब की प्रति व्यक्ति सहायता की मजबूती को दर्शाता है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में सऊदी अरब अपनी इस स्थिति को और मजबूत कर सकता है। KSrelief पहले से ही कई अफ्रीकी, एशियाई और मध्य पूर्वी देशों में सक्रिय परियोजनाएं चला रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ रहा है।

यह उपलब्धि न केवल सऊदी अरब के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल भी है कि धन-संपदा का सही इस्तेमाल मानवता की भलाई के लिए कैसे किया जा सकता है।

स्रोत: United Nations Financial Tracking Service, Saudi Press Agency (SPA), Arab News, Asharq Al-Awsat