Key Highlights

  • दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का निधन।
  • नोएडा स्थित अपने आवास पर आत्महत्या की।
  • सुसाइड नोट में स्वास्थ्य समस्याओं का जिक्र।

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता का दुखद निधन

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता ने नोएडा में स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली। इस खबर ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में गहरा सदमा पहुंचाया है। वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी रहे मेहता का शव आज सुबह उनके नोएडा सेक्टर 39 स्थित घर पर मिला। पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को उनके आवास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इस नोट में मेहता ने अपनी बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं और बीमारियों को अपने इस आत्मघाती कदम का कारण बताया है। नोट में किसी अन्य व्यक्ति या बाहरी दबाव का कोई उल्लेख नहीं है, जो प्रथम दृष्टया उनके निजी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं की ओर इशारा करता है। परिवार के सदस्यों द्वारा घटना की सूचना दिए जाने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी।

कौन थे राकेश मेहता? एक लंबा और प्रतिष्ठित करियर

राकेश मेहता एक अनुभवी और सम्मानित आईएएस अधिकारी थे। उन्होंने दिल्ली के मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं, खासकर शीला दीक्षित के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका कार्यकाल नीतियों को लागू करने और प्रशासनिक दक्षता बनाए रखने के लिए जाना जाता था। मेहता अपने करियर के दौरान कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर भी रहे, जहां उन्होंने लोक सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई।

उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड के सीईओ और दिल्ली शहरी कला आयोग के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया था। अपनी प्रशासनिक क्षमताओं के लिए वे हमेशा सराहे जाते रहे। उनके निधन से प्रशासनिक समुदाय में गहरा शोक है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है, हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स सुसाइड नोट में वर्णित कारणों की पुष्टि करती हैं।

पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई

नोएडा पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और सबूत जुटाए। उन्होंने पुष्टि की कि सुसाइड नोट में किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है, और यह कदम पूरी तरह से उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य चुनौतियों के कारण उठाया गया प्रतीत होता है। इस दुखद घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और बढ़ती बीमारियों के प्रबंधन की चुनौतियों पर बहस छेड़ दी है।

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