Key Highlights

  • अमित मालवीय ने बीजेपी के आईटी सेल को एक शक्तिशाली हथियार बनाया।
  • उनके कार्यकाल में फर्जी खबरों के आरोप और कई हाई-प्रोफाइल मानहानि के मुकदमे दर्ज हुए।
  • हाल ही में उन्हें बीजेपी के सोशल मीडिया इंचार्ज पद से हटा दिया गया।

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के आईटी सेल प्रमुख के रूप में अमित मालवीय का कार्यकाल अक्सर सुर्खियों में रहा। फर्जी खबरों के कथित प्रसार से लेकर अदालती मुकदमों तक, यह यात्रा राजनीतिक संचार के बदलते परिदृश्य को दर्शाती है। हाल ही में उन्हें पार्टी के सोशल मीडिया इंचार्ज पद से हटाए जाने की खबरों ने एक बार फिर उनके विवादित कार्यकाल को चर्चा में ला दिया है।

बीजेपी के डिजिटल विस्तार का चेहरा

अमित मालवीय ने 2015 में बीजेपी के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख का पद संभाला। उनके नेतृत्व में बीजेपी के आईटी सेल ने सोशल मीडिया पर पार्टी के संदेशों को प्रभावी ढंग से फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने पार्टी को अपने विरोधियों से एक कदम आगे रखने में मदद की, खासकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर।

डिजिटल रणनीति को मजबूत करने में मालवीय का योगदान निर्विवाद रहा। उन्होंने बीजेपी की ऑनलाइन उपस्थिति को व्यापक बनाया। पार्टी की विचारधारा और नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया एक मजबूत माध्यम बन गया।

विवादों का सिलसिला: फर्जी खबरें और दुष्प्रचार के आरोप

मालवीय के कार्यकाल को केवल संगठनात्मक सफलता के लिए नहीं जाना जाता। यह फर्जी खबरों, दुष्प्रचार और विरोधी आवाजों को चुप कराने के आरोपों से भी घिरा रहा। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने उन पर लगातार सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। ये आरोप अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनते रहे।

साल 2020 में, कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बारे में कथित तौर पर एक भ्रामक वीडियो साझा करने के लिए उनके खिलाफ कर्नाटक में एफआईआर दर्ज हुई। विपक्षी दल ने दावा किया कि मालवीय ने राहुल गांधी की छवि खराब करने की कोशिश की थी। इस घटना ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था।

अदालती जंग: मानहानि के मुकदमे

विवाद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहे। मालवीय को कई मानहानि मुकदमों का भी सामना करना पड़ा। ‘द वायर’ जैसे मीडिया संगठनों ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मालवीय और बीजेपी ने उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण प्रचार किया।

हाल ही में, कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी मालवीय के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की। उन्होंने उन पर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ आपत्तिजनक और भ्रामक पोस्ट साझा करने का आरोप लगाया। ये मुकदमे डिजिटल युग में सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिष्ठा की रक्षा की चुनौती को दर्शाते हैं।

हालिया बदलाव और आगे की राह

रिपोर्टों के अनुसार, अमित मालवीय को बीजेपी के सोशल मीडिया इंचार्ज पद से हटा दिया गया है। हालांकि, वे राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख बने हुए हैं। कांग्रेस नेता मुमताज पटेल ने उनके हटाए जाने पर खुशी व्यक्त की है। उनका कहना था कि मालवीय ने राहुल गांधी के खिलाफ ‘प्रोपेगैंडा’ चलाया था।

यह घटनाक्रम बीजेपी की डिजिटल रणनीति में संभावित बदलाव का संकेत देता है। मालवीय का कार्यकाल भारतीय राजनीति में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और इससे जुड़ी नैतिक चुनौतियों का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सूचना का प्रवाह और उसके दुरुपयोग के आरोप भविष्य में भी बहस का विषय बने रहेंगे।

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