Key Highlights

  • बीजेपी सांसद मनोज तिवारी का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है।
  • वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि यह बिहार उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत के बाद का है।
  • फैक्ट-चेक में सामने आया कि यह वीडियो कई साल पुराना है और इसका मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से कोई लेना-देना नहीं।

बिहार उपचुनाव और मनोज तिवारी का वायरल वीडियो: क्या है असली कहानी?

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी सुर्खियां बटोर रहा है। इसमें बीजेपी सांसद और भोजपुरी गायक मनोज तिवारी भावुक होते दिख रहे हैं। वीडियो साझा करने वाले यूजर्स दावा कर रहे हैं कि यह बिहार के एक उपचुनाव में राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कथित जीत के बाद मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया है। मगर, सच्चाई कुछ और ही है। हमारी पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और गलत पाया गया।

यह वीडियो तेजी से विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया जा रहा है, जिसमें कैप्शन दिए जा रहे हैं कि प्रशांत किशोर ने बिहार उपचुनाव में जीत दर्ज की है, और इसी खबर से मनोज तिवारी भावुक हो उठे हैं। कुछ पोस्ट्स में तो इसे बांकीपुर उपचुनाव से भी जोड़ा जा रहा है।

वीडियो की असलियत: एक पुरानी क्लिप

इस वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए जब हमने जांच शुरू की, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। यह वीडियो दरअसल कई साल पुराना है। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) और अन्य विश्वसनीय फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट्स ने पुष्टि की है कि यह क्लिप कम से कम छह साल पुरानी है, या कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, 2020 की है। मनोज तिवारी उस वक्त किसी इंटरव्यू के दौरान भावुक हो गए थे। इसका वर्तमान में चल रहे किसी भी बिहार उपचुनाव या प्रशांत किशोर की किसी चुनावी जीत से कोई संबंध नहीं है।

वीडियो में दिख रही भावुकता का कारण पूरी तरह से अलग था और वह किसी चुनावी नतीजे से जुड़ा हुआ नहीं था। सोशल मीडिया पर जानबूझकर एक पुरानी क्लिप को वर्तमान राजनीतिक संदर्भ से जोड़कर गलत जानकारी फैलाई जा रही है।

प्रशांत किशोर की कथित जीत और बांकीपुर उपचुनाव का सच

वायरल दावे में जिस तरह प्रशांत किशोर की 'जीत' का जिक्र किया जा रहा है, वह भी सच्चाई से परे है। प्रशांत किशोर एक राजनीतिक रणनीतिकार हैं, जिन्होंने बिहार में विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए काम किया है। उन्होंने किसी भी बिहार उपचुनाव में स्वयं उम्मीदवार के रूप में चुनाव नहीं लड़ा है और न ही किसी सीट पर जीत दर्ज की है। बांकीपुर उपचुनाव का भी दावा निराधार है। ऐसे में, उनके जीतने के दावे और उस पर मनोज तिवारी के भावुक होने की बात अपने आप में ही गलत साबित हो जाती है।

यह स्पष्ट है कि यह वीडियो किसी भी मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ा नहीं है। इसका उद्देश्य सिर्फ भ्रम फैलाना है।

गलत सूचनाओं से रहें सचेत

आज के डिजिटल युग में, ऐसी भ्रामक सूचनाएं तेजी से फैलती हैं। कई फैक्ट-चेकिंग संगठनों ने इस वायरल वीडियो के दावे को खारिज किया है। हमारी आपसे अपील है कि किसी भी वीडियो या खबर को आगे साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। अफवाहों पर ध्यान न दें और विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। ऐसी गलत खबरें सामाजिक और राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।

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