Key Highlights

  • झारखंड में छात्रों को शिक्षा फीस भरने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है।
  • कई छात्र रेलवे प्लेटफॉर्म पर सोने और फूड डिलीवरी का काम करने को मजबूर हैं।
  • यह स्थिति राज्य भर में युवाओं और अभिभावकों के बीच गहरा गुस्सा पैदा कर रही है।

झारखंड में छात्रों के बीच गहरा गुस्सा पनप रहा है। राज्य के युवाओं को अपनी उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए भारी आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि कई छात्र फीस भरने और अपना गुजारा चलाने के लिए प्लेटफॉर्म पर रातें बिताने और स्विगी जैसी कंपनियों के लिए डिलीवरी बॉय का काम करने पर मजबूर हैं। इस तरह की खबरें सामने आने के बाद राज्य में उबाल आ गया है।

शिक्षा का बोझ: जब पढ़ाई बनती है लग्जरी

शिक्षा कभी बुनियादी अधिकार थी, अब झारखंड के कई परिवारों के लिए यह एक लक्जरी बन गई है। कॉलेज और विश्वविद्यालय की फीस लगातार बढ़ रही है। सरकारी सहायता और छात्रवृत्ति योजनाएँ अक्सर अपर्याप्त साबित होती हैं। ऐसे में साधारण पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए अपनी पढ़ाई जारी रख पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। वे भविष्य के सुनहरे सपनों को पूरा करने के लिए कड़े इम्तिहान दे रहे हैं, लेकिन आर्थिक बाधाएँ एक बड़ी दीवार बनकर खड़ी हैं।

प्लेटफ़ॉर्म पर ठिकाना, रात में डिलीवरी

राजधानी रांची और अन्य शहरों में यह नजारा आम हो चला है। दिन में क्लास अटेंड करने वाले कई छात्र रात में रेलवे प्लेटफॉर्म या बस स्टैंड पर सो रहे हैं। सुबह उठकर अपनी किताबों में खो जाते हैं। शाम होते ही वे फूड डिलीवरी ऐप्स पर ऑनलाइन हो जाते हैं। उनकी बाइक की हेडलाइट्स शहर की सड़कों पर भटकती रहती हैं, खाने के पैकेट पहुंचाती हैं। इस कमाई से वे अपनी फीस और हॉस्टल का किराया निकालते हैं, अक्सर भूखे रहकर या सिर्फ एक वक्त का खाना खाकर। यह एक हृदय विदारक वास्तविकता है, जो राज्य की गंभीर आर्थिक चुनौतियों को उजागर करती है।

💡 Did You Know? भारत में शिक्षा ऋण एक बड़ा मुद्दा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, छात्रों पर लगभग 90,000 करोड़ रुपये का शिक्षा ऋण बकाया है, जो कई परिवारों के लिए एक भारी बोझ बन गया है।

बेरोज़गारी का साया और बढ़ता असंतोष

इस संघर्ष के पीछे सिर्फ बढ़ती फीस ही नहीं, बल्कि राज्य में गहराती बेरोजगारी भी एक बड़ा कारक है। युवाओं को लगता है कि शिक्षा पूरी करने के बाद भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं। सरकारी नौकरियों की कमी और निजी क्षेत्र में सीमित विकल्प उन्हें अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल रहे हैं। इस कारण वे शिक्षा में निवेश करने से हिचकते हैं या फिर निवेश करने के बाद भी निराश होते हैं। यह व्यापक निराशा ही अब गुस्से में बदल रही है।

सरकार से उम्मीदें और जनता की पुकार

जनता और छात्र संगठन लगातार सरकार से इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देने की अपील कर रहे हैं। उनकी मांग है कि शिक्षा को सस्ता बनाया जाए, छात्रों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाए और राज्य में रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं। इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन भी हुए हैं, जिनमें छात्रों ने अपनी दुर्दशा बयां की। सामाजिक कार्यकर्ता भी सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय न हो। यह केवल छात्रों का नहीं, बल्कि पूरे राज्य के भविष्य का सवाल है।

इस जटिल समस्या का समाधान ढूंढना बेहद जरूरी है, ताकि झारखंड के युवा अपने सपनों को पूरा कर सकें और उन्हें इतनी कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े। इस संबंध में अधिक अपडेट्स के लिए Vews.in पर बने रहें।