मुख्य बिंदु
- द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन योजना का कड़ा विरोध किया है।
- विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य राजनीतिक लाभ उठाना है और यह संघीय ढांचे के खिलाफ है।
- संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत परिसीमन आयोग की नियुक्ति की प्रक्रिया और उद्देश्यों पर सवाल उठाए गए हैं।
विपक्ष का तीखा विरोध, प्रस्ताव पर उठ रहे सवाल
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन योजना को लेकर प्रमुख विपक्षी दलों ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस कदम को 'असंवैधानिक' और 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' करार दिया है। दलों का कहना है कि यह प्रस्ताव देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का प्रयास है।
DMK की मुख्य चिंताएं: दक्षिण भारत की अनदेखी का आरोप
तमिलनाडु की सत्तारूढ़ DMK ने इस प्रस्ताव पर विशेष आपत्ति जताई है। पार्टी का तर्क है कि परिसीमन का आधार 2026 तक की जनगणना होनी चाहिए, लेकिन सरकार 1971 की जनगणना के आधार पर ही आगे बढ़ रही है। DMK का मानना है कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों के हितों को नुकसान पहुंचेगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
पार्टी के नेताओं ने कहा है कि जनसंख्या वृद्धि के अनुपात में सीटों का पुनर्गठन नहीं होने से दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। यह सीधे तौर पर राज्यों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला है, जो किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं होगा।
TMC और कांग्रेस का रुख: राजनीतिक मंशा पर सवाल
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और कांग्रेस ने भी इस प्रस्ताव की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन का इस्तेमाल करना चाहती है।
TMC का कहना है कि मौजूदा परिसीमन प्रक्रिया में किसी भी बदलाव से पहले सभी राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए। वहीं, कांग्रेस ने इस कदम को 'जनता के जनादेश का अपमान' बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि परिसीमन एक संवेदनशील प्रक्रिया है और इसे निष्पक्ष व पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए, न कि किसी खास एजेंडे के तहत।
संविधान की धारा 82 और परिसीमन आयोग
संविधान के अनुच्छेद 82 के तहत, हर जनगणना के बाद संसद को परिसीमन अधिनियम बनाने का अधिकार है। परिसीमन आयोग का मुख्य काम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों के आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का काम करना है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या यथासंभव एक समान हो।
हालांकि, वर्तमान प्रस्तावित योजना में शामिल किए गए कुछ विशिष्ट प्रस्तावों को लेकर विपक्षी दलों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया निष्पक्ष होने के बजाय पक्षपाती हो सकती है, जिससे चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
आगे क्या? राजनीतिक गलियारों में गरमाई बहस
विपक्षी दलों के कड़े विरोध के चलते, केंद्र सरकार के इस प्रस्ताव पर राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। यह देखना अहम होगा कि सरकार इन आपत्तियों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या वह अपनी प्रस्तावित योजना में कोई बदलाव करती है।
इस पूरे मुद्दे पर विपक्षी दलों की एकजुटता यह दर्शाती है कि वे सरकार के किसी भी ऐसे कदम को चुनौती देने के लिए तैयार हैं, जिसे वे अनुचित मानते हैं। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर और अधिक राजनीतिक सरगर्मी देखने को मिल सकती है।
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