मुख्य झलकियाँ
- हज 2026 अपने अंतिम चरण में, तीर्थयात्री शैतान पर कंकड़ मारने की रस्म पूरी कर रहे हैं।
- यह रस्म, जिसे 'जमारात' कहा जाता है, इस्लाम में शैतानी ताकतों पर जीत का प्रतीक है।
- लाखों मुस्लिम श्रद्धालु शांति और भक्ति के साथ पवित्र यात्रा संपन्न कर रहे हैं।
अंतिम रस्में, गहरा आध्यात्मिक महत्व
सऊदी अरब में हज 2026 का समापन नज़दीक आते ही, दुनिया भर से आए लाखों मुस्लिम तीर्थयात्री 'जमारात' की रस्म में शामिल हो रहे हैं। यह रस्म, जिसमें श्रद्धालु शैतान का प्रतीक माने जाने वाले तीन खंभों पर कंकड़ फेंकते हैं, इब्राहिम (अब्राहम) की शैतान को पत्थर मारने की आज्ञाकारिता को दर्शाती है। यह हज की सबसे महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक रस्मों में से एक है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है।
श्रद्धा और व्यवस्था का संगम
मीना घाटी में स्थित 'जमारात' के तीनों स्तंभों पर कंकड़ फेंकने के लिए तीर्थयात्रियों ने विशाल भीड़ लगाई। व्यवस्था बनाए रखने के लिए सऊदी अधिकारियों ने कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए थे। चिलचिलाती धूप के बावजूद, श्रद्धालुओं के चेहरों पर ईश्वर के प्रति गहरी आस्था और पवित्र यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने का संतोष साफ झलक रहा था। यह दृश्य इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक, हज के महत्व को रेखांकित करता है।
इस्लाम में हज का स्थान
हज, हर समर्थ मुसलमान के लिए जीवन में एक बार की जाने वाली अनिवार्य तीर्थयात्रा है। यह आध्यात्मिक शुद्धि, ईश्वर के प्रति समर्पण और मुस्लिम समुदाय की एकता का एक शक्तिशाली प्रतीक है। हज के दौरान, तीर्थयात्री कई रस्मों को पूरा करते हैं, जिनमें 'तवाफ़' (काबा का चक्कर लगाना) और 'सई' (सफा और मरवाह पहाड़ियों के बीच दौड़ना) शामिल हैं। 'जमारात' की रस्म इन महत्वपूर्ण अनुष्ठानों का एक अभिन्न अंग है।
अगले कदम: ईद अल-अज़हा और घर वापसी
जमारात की रस्म पूरी करने के बाद, तीर्थयात्री 'तवाफ अल-विदा' (विदाई तवाफ) के लिए मक्का लौटेंगे। इसके बाद वे अपने-अपने देशों के लिए प्रस्थान करेंगे, अपने साथ आध्यात्मिक अनुभव और ईश्वर के करीब आने की भावना लेकर। यह पवित्र यात्रा न केवल व्यक्तिगत शुद्धि का माध्यम है, बल्कि दुनिया भर के मुसलमानों के बीच भाईचारे और एकता की भावना को भी मजबूत करती है। आप पयाम नाम का अर्थ, उत्पत्ति और व्यक्तित्व: एक सुंदर मुस्लिम नाम जैसे अन्य महत्वपूर्ण लेखों के लिए Vews News पर जुड़े रह सकते हैं।