मुख्य अंश

  • प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ कहा कि फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना इजरायल की सुरक्षा के लिए खतरा होगी।
  • उन्होंने इस विचार को 'अस्वीकार्य' करार दिया और किसी भी ऐसे समझौते का विरोध किया जिससे फिलिस्तीनियों को संप्रभुता मिले।
  • यह बयान ऐसे समय में आया है जब गाजा पट्टी में युद्ध जारी है और मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें धुंधली हो रही हैं।

नेतन्याहू का कड़ा रुख, 'दो-राज्य समाधान' पर सवाल

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के शासन के तहत फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना उनके लिए 'अस्वीकार्य' है। एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान, नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि वह किसी भी ऐसे समझौते का समर्थन नहीं करेंगे जिससे फिलिस्तीनियों को संप्रभुता मिले। उनका मानना है कि ऐसी किसी भी स्थिति में इजरायल की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा होगा।

सुरक्षा संबंधी चिंताएं प्रमुख, फिलिस्तीनी नेताओं की निराशा

प्रधानमंत्री के इस बयान ने फिलिस्तीनी नेताओं और अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों को निराश किया है, जो दशकों से 'दो-राज्य समाधान' की वकालत करते आ रहे हैं। यह समाधान इजरायल के साथ एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की परिकल्पना करता है। नेतन्याहू ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि इजरायल को हमेशा गाजा और वेस्ट बैंक में अपनी पूर्ण सुरक्षा क्षमता बनाए रखने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा, 'मैं किसी भी ऐसे समझौते पर सहमत नहीं होऊंगा जो फिलिस्तीनी संप्रभुता को सक्षम करे।'

क्षेत्रीय तनाव और भविष्य की राह

नेतन्याहू का यह कड़ा रुख मध्य पूर्व में पहले से ही जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक पेचीदा बनाता है। गाजा में चल रहा युद्ध, जिसमें हमास के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी है, ने शांति प्रयासों को गहरा झटका दिया है। इजरायल का तर्क है कि हमास जैसे समूहों के रहते फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना से क्षेत्र में और अस्थिरता फैलेगी। वहीं, फिलिस्तीनी पक्ष और कई अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना ​​है कि 'दो-राज्य समाधान' ही स्थायी शांति का एकमात्र व्यवहार्य रास्ता है। नेतन्याहू के ताजा बयानों से इस दिशा में भविष्य की राह और कठिन नजर आ रही है।

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