मुख्य बातें
- लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल औन ने इजराइल के साथ हुए समुद्री सीमा समझौते को 'एक बड़ी उपलब्धि' बताया है।
- हिज़्बुल्लाह ने इस समझौते का कड़ा विरोध किया है, इसे देश की संप्रभुता से समझौता करार दिया है।
- यह समझौता दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एक अभूतपूर्व समझौता: लेबनान में खुशी, हिज़्बुल्लाह में नाराज़गी
लेबनान के राष्ट्रपति मिशेल औन ने इज़राइल के साथ हाल ही में हुए समुद्री सीमा समझौते को एक 'ऐतिहासिक उपलब्धि' बताते हुए इसकी सराहना की है। यह समझौता दशकों से चले आ रहे दो पड़ोसी देशों के बीच भू-राजनीतिक तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राष्ट्रपति औन ने इस समझौते को लेबनान की संप्रभुता और आर्थिक हितों की रक्षा करने वाला बताया है, खासकर गैस अन्वेषण के मद्देनजर।
हिज़्बुल्लाह का कड़ा रुख: 'संप्रभुता से समझौता बर्दाश्त नहीं'
हालांकि, लेबनान के शक्तिशाली शिया मुस्लिम समूह हिज़्बुल्लाह ने इस समझौते पर कड़ी आपत्ति जताई है। हिज़्बुल्लाह, जो लेबनान की सरकार में एक प्रमुख शक्ति है और जिसके पास एक मजबूत सशस्त्र बल है, ने इस कदम को देश की संप्रभुता के साथ 'समझौता' करार दिया है। समूह ने चेतावनी दी है कि इस तरह के किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो राष्ट्रीय गरिमा और संप्रभुता से समझौता करे। यह विरोधाभास लेबनान के भीतर एक जटिल राजनीतिक परिदृश्य को दर्शाता है।
गैस का खजाना और कूटनीति की राह
यह समझौता पूर्वी भूमध्य सागर में संभावित गैस भंडारों को लेकर है, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ाया था। अब, एक समझौते के साथ, दोनों देश अपने-अपने विशेष आर्थिक क्षेत्रों में अन्वेषण और उत्पादन शुरू कर सकते हैं, जिससे लेबनान को आर्थिक मंदी से उबरने में मदद मिल सकती है। हालांकि, हिज़्बुल्लाह की आपत्ति इस उम्मीदों पर पानी फेर सकती है, क्योंकि समूह का लेबनान की नीतियों पर महत्वपूर्ण प्रभाव है।
यह देखना बाकी है कि हिज़्बुल्लाह का विरोध कितना गंभीर रूप लेता है और क्या यह लेबनान सरकार के रुख को प्रभावित कर पाएगा। इस मुद्दे पर आगे की जानकारी के लिए Vews.in पर बने रहें।