Key Highlights

  • भारतीय संसद ने कतर के पूर्व अमीर शेख खलीफा बिन हमद अल थानी को श्रद्धांजलि दी।
  • लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके कतर और भारत-कतर संबंधों में योगदान को याद किया।
  • यह सम्मान उनके जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर दिया गया।

भारतीय संसद के निचले सदन, लोकसभा ने कतर के दिवंगत पूर्व अमीर शेख खलीफा बिन हमद अल थानी को मंगलवार को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सदस्यों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और भारत-कतर संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान को याद किया। यह विशेष सत्र कतर के पूर्व शासक के जन्म शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित किया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि शेख खलीफा बिन हमद अल थानी एक दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने कतर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका शासनकाल देश में स्थिरता और प्रगति का प्रतीक रहा। बिरला ने जोर दिया कि उनके नेतृत्व में भारत और कतर के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध गहरे हुए। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुँचे।

भारत-कतर मित्रता के शिल्पकार: एक दूरदर्शी नेता को सलाम

अध्यक्ष बिरला ने शेख खलीफा के वैश्विक मंच पर कतर की भूमिका को मजबूत करने के प्रयासों को भी सराहा। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों से मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता को बढ़ावा मिला। शेख खलीफा ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कतर का प्रतिनिधित्व किया। उनके निधन ने केवल कतर को ही नहीं, बल्कि वैश्विक समुदाय को भी एक महान नेता से वंचित कर दिया। सदन ने दिवंगत आत्मा के सम्मान में एक मिनट का मौन भी रखा। यह मौन सभी सदस्यों ने खड़े होकर रखा।

शेख खलीफा बिन हमद अल थानी ने 1972 से 1995 तक कतर पर शासन किया। उनके शासनकाल में कतर ने तेल और गैस संसाधनों का लाभ उठाते हुए तेजी से आर्थिक विकास किया। उन्होंने कतर को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका विजन आज भी कतर के विकास पथ को प्रेरणा देता है।

द्विपक्षीय संबंधों का मजबूत आधार: अल थानी का योगदान

भारत और कतर के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरे और सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं। भारतीय समुदाय कतर में सबसे बड़े प्रवासी समुदायों में से एक है। ये लोग कतर के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। शेख खलीफा के कार्यकाल में इन संबंधों को और मजबूती मिली। उनके समय में भारतीय श्रमिकों और पेशेवरों के लिए कतर में अवसर बढ़े। द्विपक्षीय व्यापार भी लगातार फलता-फूलता रहा।

💡 Did You Know? शेख खलीफा बिन हमद अल थानी का जन्म 1924 में हुआ था और उनका निधन 2016 में हुआ। लोकसभा में उन्हें श्रद्धांजलि उनके जन्म शताब्दी वर्ष (1924-2024) के अवसर पर दी गई।

आज भी भारत और कतर विभिन्न क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें ऊर्जा, व्यापार, निवेश और लोगों से लोगों के बीच संपर्क शामिल है। यह श्रद्धांजलि न केवल एक व्यक्ति को सम्मान देती है, बल्कि उन मजबूत जड़ों को भी याद करती है जिन पर दोनों देशों के बीच संबंधों की इमारत खड़ी है। यह राजनयिक पहल दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ती को दर्शाती है।

इस प्रकार के संसदीय सम्मान दर्शाते हैं कि भारत अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को कितना महत्व देता है। यह अन्य देशों के नेताओं के प्रति भारत के आदर और सद्भावना का प्रतीक है। यह कदम वैश्विक मंच पर भारत की राजनयिक परिपक्वता को भी उजागर करता है। ऐसे संबंधों की मजबूती वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए आवश्यक है।
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