Key Highlights

  • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ 'सैन्य कार्रवाई खत्म नहीं हुई' का बयान दिया।
  • ट्रंप ने अपने कार्यकाल में ईरान को परमाणु समझौते के लिए 'आखिरी मौका' दिया था।
  • अमेरिका ने पहले स्पष्ट किया था कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाने वाला बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई 'अभी खत्म नहीं हुई' है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ट्रंप का यह रुख उनके राष्ट्रपति पद के दौरान ईरान के प्रति अपनाई गई सख्त नीति की याद दिलाता है।

ट्रंप का 'अधूरा काम': ईरान पर फिर कड़ा रुख?

ट्रंप ने अपने बयान से यह संकेत दिया है कि ईरान को लेकर उनकी नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। उनके कार्यकाल में, अमेरिका ने ईरान परमाणु समझौते (ज्वाइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन - JCPOA) से खुद को अलग कर लिया था। इसके बाद ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए। तत्कालीन अमेरिकी प्रशासन ने कई बार सैन्य विकल्पों पर विचार करने की बात भी कही थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान को परमाणु डील तक पहुंचने के लिए 'आखिरी मौका' देने का दावा भी किया था। उनका ताजा बयान इन्हीं पुरानी धमकियों और नीतियों की निरंतरता प्रतीत होता है।

परमाणु समझौता: एक 'आखिरी मौका' की कहानी

ट्रंप के पूर्व प्रशासन ने ईरान पर अधिकतम दबाव बनाने की रणनीति अपनाई थी। इसी रणनीति के तहत, कई बार सीधे सैन्य टकराव की स्थिति बनी। 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद तनाव अपने चरम पर पहुंच गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह भी साफ किया था कि अमेरिका ईरान के साथ किसी भी संभावित युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करेगा। उन्होंने एक समय पर सैन्य हमले को अंतिम क्षण में रोकने का दावा भी किया था, यह कहते हुए कि वह बड़ी संख्या में लोगों की जान नहीं लेना चाहते थे। ये सभी घटनाक्रम ट्रंप के ईरान नीति के जटिल पहलुओं को दर्शाते हैं।

वैश्विक प्रतिक्रिया और अनिश्चित भविष्य

ट्रंप के इस बयान से स्वाभाविक रूप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हलचल मच गई है। चीन जैसे देशों ने पहले ही अमेरिका को मध्य पूर्व में सावधानी बरतने की सलाह दी थी। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है। ऐसे में, ट्रंप का यह बयान आने वाले समय में भू-राजनीतिक समीकरणों में और अस्थिरता ला सकता है। दुनिया अब बारीकी से देख रही है कि इस बयान के क्या निहितार्थ निकलते हैं और क्या ट्रंप की टिप्पणी किसी बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है।

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