Key Highlights

  • यूएई में भारतीय प्रवासियों को बायोमेट्रिक धोखाधड़ी के बढ़ते खतरों से सावधान किया गया।
  • धोखेबाज उंगलियों के निशान और चेहरे की पहचान जैसी संवेदनशील जानकारी चुरा रहे हैं।
  • विशेषज्ञों ने अज्ञात स्रोतों से बायोमेट्रिक डेटा साझा न करने की सलाह दी है।

यूएई में भारतीय प्रवासियों को बायोमेट्रिक धोखाधड़ी से खतरा

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले भारतीय प्रवासियों को बायोमेट्रिक डेटा से जुड़ी धोखाधड़ी के प्रति गंभीर चेतावनी जारी की गई है। धोखेबाज अब नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे उंगलियों के निशान और चेहरे की पहचान जैसे संवेदनशील डेटा का दुरुपयोग करके लोगों की पहचान चुराने और वित्तीय जालसाजी को अंजाम देने की कोशिश में हैं।

कैसे काम करते हैं ये धोखेबाज?

अधिकारी बताते हैं कि ये धोखेबाज अक्सर फर्जी वेबसाइटों, सोशल मीडिया संदेशों या नकली ग्राहक सेवा कॉल के ज़रिए संपर्क करते हैं। वे सरकारी योजनाओं, बैंक सत्यापन या नौकरी के अवसरों का झांसा देते हैं। इसके बाद वे व्यक्ति से 'सत्यापन' के बहाने बायोमेट्रिक स्कैन प्रदान करने के लिए कहते हैं। एक बार जब उनके पास यह डेटा आ जाता है, तो वे इसका उपयोग विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं या बैंक खातों तक पहुंच प्राप्त करने के लिए करते हैं। इससे भारी वित्तीय नुकसान हो सकता है।

निशाने पर क्यों हैं भारतीय प्रवासी?

यूएई में भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या है। इनमें से कई लोग देश में नए होते हैं, या फिर डिजिटल लेनदेन और स्थानीय नियमों से पूरी तरह वाकिफ नहीं होते। यही वजह है कि वे धोखेबाजों के आसान शिकार बन जाते हैं। अपनी पहचान और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक सतर्कता बेहद ज़रूरी है।

सुरक्षा के लिए क्या करें?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं। किसी भी अज्ञात या अविश्वसनीय स्रोत से आने वाले बायोमेट्रिक स्कैन अनुरोधों को कभी स्वीकार न करें। हमेशा सुनिश्चित करें कि आप केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टलों या बैंक ऐप्स का ही उपयोग कर रहे हैं। व्यक्तिगत जानकारी और बायोमेट्रिक डेटा साझा करने से पहले स्रोत की सत्यता की जांच अवश्य करें। अगर कोई ऑफ़र बहुत अच्छा लग रहा है, तो अक्सर उसमें कुछ गड़बड़ होती है।

कानूनी कार्रवाई और जागरूकता

यूएई की सरकार और संबंधित एजेंसियां इन धोखाधड़ी के मामलों पर गंभीरता से काम कर रही हैं। वे जनता को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करना हर प्रवासी की ज़िम्मेदारी है। यह न केवल खुद को बल्कि समुदाय को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है। धोखेबाजों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए सामूहिक जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है।

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