Key Highlights

  • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने US-ईरान सैन्य टकराव को 'मामूली बात' करार दिया।
  • ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसे 'युद्ध' नहीं माना जाना चाहिए।
  • अमेरिका ने ईरान के प्रमुख परमाणु स्थल 'पिकैक्स माउंटेन' को अपने लक्ष्यों में शामिल किया।

ट्रंप ने अमेरिका-ईरान टकराव को बताया 'मामूली', 'युद्ध' कहने से इनकार

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव को 'मामूली बात' करार दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि इसे 'युद्ध' के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो रही है। ट्रंप ने इस संबंध में सीनेटर जे.डी. वेंस के विचारों से भी सहमति जताई, जिन्होंने पहले भी इसे 'युद्ध' मानने से इनकार किया था।

वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में ट्रंप के इस बयान ने हलचल मचा दी है। उनका कहना था, “यह हमारे लिए छोटा आलू है।” इस बयान से स्पष्ट होता है कि वे इस क्षेत्रीय गतिरोध को अमेरिका के लिए कोई बड़ा खतरा नहीं मानते। उनके कार्यकाल में भी ईरान के साथ संबंध काफी तनावपूर्ण रहे थे, जिसमें कई सैन्य और आर्थिक प्रतिबंध शामिल थे।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी नजर, बढ़ी डीजल की कीमतें

एक तरफ ट्रंप इस टकराव को कम आंक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन ईरान के खिलाफ अपने लक्ष्यों की सूची का विस्तार कर रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के प्रमुख परमाणु स्थल 'पिकैक्स माउंटेन' को अपने संभावित सैन्य लक्ष्यों की सूची में शामिल किया है। यह कदम ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने के अमेरिकी प्रयासों को दर्शाता है, खासकर जब से अंतरराष्ट्रीय निगरानी को लेकर विवाद बढ़ा है।

💡 Did You Know? होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान के करीब है, वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल का लगभग 20% इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

इस बीच, भू-राजनीतिक अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है। अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं, जो $5.85 प्रति गैलन तक पहुंच गई हैं। यह ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला की चिंताओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में कोई भी बड़ा सैन्य तनाव तेल की कीमतों को और बढ़ा सकता है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

ट्रंप का बयान उस समय आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। हालांकि, ईरान ने भी अपनी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का जवाब देने का संकल्प लिया है। आने वाले समय में देखना होगा कि ट्रंप के इन बयानों का अमेरिका की मौजूदा विदेश नीति पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस विषय पर अधिक विस्तृत समाचार कवरेज के लिए, Vews.in पर विजिट करें।