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बीते लम्हों की आहट - Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली कविता

Furkan S Khan द्वारा रचित 'बीते लम्हों की आहट' कविता, बचपन की अनमोल यादों और पुराने दिनों के अहसास को दर्शाती है।

Monday, September 21, 2026
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बीते लम्हों की आहट - Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली कविता
“बीते लम्हों की आहट - Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली कविता”
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21 September 2026
बीते लम्हों की आहट - Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली कविता
दोहे
वो गलियाँ सूनी यादें, मन में फिर आबाद थी बीते लम्हों की आहट, आज भी कुछ ख़ास थी धूल जमी थी शीशों पर, पर तस्वीर साफ़ थी छूटा हुआ वो बचपन, दिल की हर आस थी खोए हुए थे सब हम, दुनिया बेहिसाब थी आज भी उस पल की खुशबू, हवा में ख़्वाब थी
Kaafiya याद, आबाद Radeef थी
F Poetry ByFurkan S Khan
दोहे
मेरे आँगन की वो धूप, कितनी अनूप थी खेलों की वो शामें, खुशियों से भरपूर थी मिट्टी की सौंधी खुशबू, हवा में मख़मूर थी हर पल में एक सरलता, जो अब दूर थी वो बेफिक्र हँसी गूंजती, हर ओर हुज़ूर थी आज भी उस पल की याद, मेरे दिल में चूर थी
Kaafiya धूप, अनूप Radeef थी
F Poetry ByFurkan S Khan

सूनी: खाली, वीरान आबाद: बसी हुई, खुशहाल आहट: पदचाप, पदध्वनि साफ़: स्पष्ट आस: आशा, उम्मीद बेहिसाब: अनगिनत, बहुत अधिक ख़्वाब: सपना

अनूप: अनुपम, अतुलनीय भरपूर: पूर्ण, लबालब मख़मूर: मदहोश, आनंदित सरलता: सादगी बेफिक्र: चिंता रहित हुज़ूर: उपस्थिति, मौजूदगी चूर: भरी हुई, व्याप्त

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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