AI Poetry•शायरी

दीदार की हसरत: रूहानी इश्क़ की इस्लामी नज़्म | Furkan S Khan

अल्लाह के दीदार की गहरी हसरत, रूहानी इश्क़ और जुदाई की तड़प को दर्शाती यह इस्लामी नज़्म। Furkan S Khan की कलम से एक आध्यात्मिक यात्रा।

Saturday, September 26, 2026
AMP 0 2
श
शायरी
NEWS CARD
Logo
दीदार की हसरत: रूहानी इश्क़ की इस्लामी नज़्म | Furkan S Khan
“दीदार की हसरत: रूहानी इश्क़ की इस्लामी नज़्म | Furkan S Khan”
Favicon
Vews
https://www.vews.in/s/jB57pr
Date
26 September 2026
दीदार की हसरत: रूहानी इश्क़ की इस्लामी नज़्म | Furkan S Khan
इस्लामी नज़्म
नैनों में बसी है एक हसरत गहरी, तेरी यादों में खोई है ये रात सुनहरी। दिल की हर धड़कन में है तेरी ही पुकार, कब होगा तेरा दीदार, ऐ मेरे सरकार। शब-ए-हिज्र की तन्हाई अब सताती है, तेरी क़ुर्बत की चाहत बस बढ़ती जाती है। ये बेताब रूह कब तक यूँ ही तड़पेगी, तेरी रहमत की बारिश कब मुझ पर बरसेगी।
💡 कठिन शब्दों के अर्थ जानने के लिए अंडरलाइन किए गए शब्दों पर टैप करें
Kaafiya गहरी, सुनहरी; पुकार, सरकार; सताती है, जाती है; तड़पेगी, बरसेगी
F Poetry ByFurkan S Khan

यह इस्लामी नज़्म (कविता) रूहानी इश्क़ और अल्लाह के दीदार की गहरी हसरत को बयां करती है। इसमें एक बंदे की अपने रब से मिलने की बेताबी, उसकी यादों में खोई हुई रातें और दिल की हर धड़कन में छिपी पुकार को दर्शाया गया है। कवि उन आँखों की प्यास को महसूस करता है जो अपने महबूब-ए-हक़ीक़ी (सच्चे प्रिय) के दीदार के लिए तरस रही हैं। 'शब-ए-हिज्र' यानी जुदाई की रात की लंबी तन्हाई और 'क़ुर्बत' यानी निकटता की बढ़ती चाहत, इस कविता के मुख्य भाव हैं। यह सिर्फ़ एक व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि हर मोमिन की उस शाश्वत यात्रा का प्रतीक है जहाँ आत्मा अपने सृष्टिकर्ता से मिलन की आस लगाए बैठी है। यह कविता धैर्य, आशा और अटूट प्रेम का संदेश देती है, जहाँ हर तड़प अल्लाह की रहमत की बारिश की उम्मीद में बदल जाती है। यह एक ऐसी आध्यात्मिक प्यास है जो केवल अल्लाह के नूर से ही बुझ सकती है। हर मोमिन के दिल में इसी प्यास की लौ जलती रहती है, जो उसे अल्लाह के करीब लाती है और उसकी रहमत की तलाश में रखती है। यह नज़्म हमें सिखाती है कि सच्ची शांति और संतोष केवल ईश्वर के प्रेम और उसकी निकटता में ही निहित है।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

Comments (0)

User