AI Poetryशायरी

भक्ति की गहराई: एक सूक्ष्म काव्य | Furkan S Khan

ईश्वर के प्रति असीम प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता एक मार्मिक सूक्ष्म काव्य। जानें भक्ति की अनमोल धारा का गहरा अर्थ।

Thursday, September 24, 2026
AMP 0 0
शायरी
NEWS CARD
Logo
भक्ति की गहराई: एक सूक्ष्म काव्य | Furkan S Khan
“भक्ति की गहराई: एक सूक्ष्म काव्य | Furkan S Khan”
Favicon
Vews
https://www.vews.in/s/SStg1R
Date
24 September 2026
भक्ति की गहराई: एक सूक्ष्म काव्य | Furkan S Khan
सूक्ष्म काव्य
ईश्वर बसता है हर कण-कण में, मेरा प्रेम समाया है तेरे मन में जब तुझको पाया, सब पा लिया, बलिहारी जाऊं तेरे तन में न कोई चाहत, न कोई आस, बस तू ही तू है मेरे धन में
Kaafiya मन, तन, धन Radeef में
F Poetry ByFurkan S Khan

यह सूक्ष्म काव्य ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। कवि कहता है कि ईश्वर हर जगह व्याप्त है, और उसका प्रेम उसी में समाया हुआ है। जब उसे ईश्वर की प्राप्ति हुई, तो उसे सब कुछ मिल गया। अब उसे किसी और चीज़ की चाह नहीं है, केवल ईश्वर ही उसका सर्वस्व है। इसमें 'बलिहारी' का अर्थ है 'न्योछावर' या 'कुर्बान'।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

Comments (0)

User