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ईश्वर के प्रति भक्ति: एक सुंदर क़ता

यह क़ता ईश्वर के प्रति गहन भक्ति और विश्वास को दर्शाता है। कवि जीवन के पथ पर ईश्वर को अपना एकमात्र सहारा मानता है।

Wednesday, September 23, 2026
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ईश्वर के प्रति भक्ति: एक सुंदर क़ता
“ईश्वर के प्रति भक्ति: एक सुंदर क़ता”
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23 September 2026
ईश्वर के प्रति भक्ति: एक सुंदर क़ता
क़ता
मन मेरा भटका, रहा ढूंढता, तुझको हर पथ है जीवन का सार यही, तुझमें ही पाया, तू ही तो नाथ है अंधेरा घना, रास्ता न सूझे, कब तक ये व्यथा है तेरी कृपा की छाँव में, चैन मिले मुझको, तू ही तो साथ है
Kaafiya पथ, सार्थ, नाथ Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

यह क़ता ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण को व्यक्त करता है। कवि जीवन की अनिश्चितताओं और भटकाव के बीच ईश्वर को ही अपना सहारा और लक्ष्य मानता है। वह ईश्वर की कृपा और साथ की कामना करता है।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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