Furkan S Khan की ज़िंदगी पर ग़ज़ल - जीवन का सफ़र

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई ज़िंदगी पर एक खूबसूरत ग़ज़ल, जो जीवन के उतार-चढ़ाव और उसके सफ़र का वर्णन करती है।

Friday, September 18, 2026
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Furkan S Khan की ज़िंदगी पर ग़ज़ल - जीवन का सफ़र
“Furkan S Khan की ज़िंदगी पर ग़ज़ल - जीवन का सफ़र”
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18 September 2026
Furkan S Khan की ज़िंदगी पर ग़ज़ल - जीवन का सफ़र
Ghazal — By Furkan S Khan
ये ज़िंदगी एक अजब सी डगर है, कभी खुशी, कभी गम की लहर है। हर पल बदलती है ये तस्वीर, समझ न पाए कोई, ये कैसी असर है। कभी उम्मीदें, कभी मायूसी, हर चेहरे की अपनी ही खबर है। देखते रहो तुम, बस एक तमाशा, ये दुनिया एक रंगीन शहर है। हर मोड़ पर इक नया इम्तेहान, हर इम्तेहान की नई डगर है। ज़िंदगी की राहों में चलते रहो, यही तो जीने की एक कसर है।
Ghazal — By Furkan S Khan
ज़िंदगी इक अनसुलझा सा राज़ है, धड़कनों में छिपी इक आवाज़ है। कभी उड़ती पतंग सी आज़ाद, कभी पिंजरे में कैद, बेआवाज़ है। हर लम्हा इक नया सबक सिखाता, हर सबक में छिपा इक फ़लसफ़ा है। कभी धूप, कभी छाँव का खेल, कभी जीत, कभी हार का बाज़ है। समझ सको तो समझ लो यारों, ज़िंदगी इक खूबसूरत लिहाज़ है। जी लो हर पल को खुल के, यही जीने का सच्चा अंदाज़ है।

डगर: रास्ता, राह लहर: तरंग मायूसी: निराशा तमाशा: खेल, द्रश्य इम्तेहान: परीक्षा कसर: कमी, अधूरी बात

अनसुलझा: जो सुलझाया न गया हो फ़लसफ़ा: दर्शन, सिद्धांत आज़ाद: स्वतंत्र बेआवाज़: चुप, खामोश लिहाज़: आदर, मान अंदाज़: तरीका, शैली

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Zainab
लेखक

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