उदासी का साया: फ़ुरकान एस खान की मार्मिक नाज़्म
फ़ुरकान एस खान द्वारा लिखी गई उदासी पर एक गहरी और मार्मिक नाज़्म। इस कविता में दिल की खामोश उदासी और दर्द को महसूस करें।
साया: परछाई, मौजूदगी। लम्हा: पल, क्षण। खामोशी: चुप्पी, शांति। नमी: गीलापन, आँसू।
ख्वाबों के महल: सपनों की दुनिया, उम्मीदें। अरमान: इच्छाएँ, अभिलाषाएँ। रूठ जाते हैं: नाराज़ हो जाते हैं, बिखर जाते हैं। छूट जाते हैं: अकेले रह जाते हैं।
नमी: गीलापन, आँसू। बरसी: बरसना, गिरना। कसक: टीस, हल्का दर्द। थमी: रुकी हुई। लबों: होंठ।
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