खामोश आँसू: दिल के अनकहे दर्द पर एक मार्मिक क़िता
फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'खामोश आँसू' एक मार्मिक क़िता है जो दिल के भीतर छिपे दर्द और आँखों में छुपी नमी को बयां करती है। भावनाओं की गहराई को छूती यह कविता।
नमी: गीलापन, आँसू। रूह: आत्मा। घाव: चोट, ज़ख्म। भीतर ही भीतर: अंदर ही अंदर, मन में ही।
तन्हाई: अकेलापन। आलम: माहौल, स्थिति। गहराइयों: गहराई में। खामोशी: चुप्पी, मौन। आहट: धीमी आवाज़, पदचाप।
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