बहराइच (उत्तर प्रदेश), 17 जनवरी: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में बीते चार दिनों से गांव के आसपास घूम रहे एक बाघ को आखिरकार वन विभाग की टीम ने बेहोश कर पकड़ लिया। यह कार्रवाई कतरनियाघाट वन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रहुआ मंसूर गांव के पास की गई।

गांव में बाघ की मौजूदगी से फैली थी दहशत

अधिकारियों के अनुसार, बाघ को सबसे पहले बहराइच जिले के मेहसी तहसील स्थित रहुआ मंसूर गांव के स्थानीय लोगों ने देखा था। बाघ के खुले इलाके में घूमने की खबर फैलते ही पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी।

यह इलाका पहले भी पिछले दो वर्षों में भेड़ियों और तेंदुओं के हमलों की घटनाएं देख चुका है, जिससे लोगों में डर और ज्यादा बढ़ गया था।

वन विभाग की रणनीति और रेस्क्यू ऑपरेशन

डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) सुंदरेशा ने बताया कि वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने का निर्णय लिया। इस दौरान मानव आबादी और स्वयं बाघ – दोनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई।

बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया, हालांकि घने कोहरे के कारण निगरानी में काफी परेशानी आई। इसके बावजूद वनकर्मियों की टीम लगातार इलाके में डटी रही।

बेहोश कर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया बाघ

कई घंटों की मशक्कत के बाद बाघ को ट्रैंक्विलाइज़र की मदद से बेहोश किया गया और सुरक्षित रूप से कब्जे में ले लिया गया। इसके बाद उसे चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

वन विभाग के अनुसार, बाघ को आगे की देखभाल और पुनर्वास के लिए सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि भविष्य में मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं से बचा जा सके।

ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

बाघ के पकड़े जाने के बाद रहुआ मंसूर और आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार दिनों से लोग खेतों और घरों से बाहर निकलने में डर रहे थे।

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि भविष्य में इस तरह की कोई भी वन्यजीव गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें और स्वयं किसी भी तरह की जोखिम भरी कार्रवाई न करें।