Heart Touching Sad & Love Shayari Collection by Furkan S Khan
ज़िंदगी के सफ़र में अक्सर कुछ ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ लफ़्ज़ कम पड़ जाते हैं और खामोशियाँ बोलने लगती हैं। Furkan S Khan की यह शायरी (Shayari Collection) उन्हीं अनकहे जज़्बातों, टूटे हुए दिल के दर्द (Pain), और मोहब्बत की तन्हाई (Loneliness) का आईना है।
अगर आप Best Sad Shayari, Romantic Ghazals, या रूह को छू लेने वाली Urdu Poetry तलाश रहे हैं, तो यह पेज आपके लिए है। यहाँ हर एक शेर दिल की गहराइयों से लिखा गया है—जो सीधे आपके दिल में उतरेगा।
- दिल को दुनिया की चमक से न सजाया जाए,
इस मुसाफ़िर को सफ़र याद दिलाया जाए। - रोज़ गिरते हैं गुनाहों में भटक कर हम लोग,
रोज़ तौबा का भी दर दिल से खुलाया जाए। - जिसको समझे थे सहारा वही धोखा निकला,
अब भरोसा तो फ़क़त रब पे ही लाया जाए। - वक़्त कम है ये समझ ले ऐ मेरे ग़ाफ़िल दिल,
आज ही ख़ुद को मोहब्बत में झुकाया जाए। - माल-ओ-दौलत का नशा साथ न जाएगा कभी,
नेकी का दीया अँधेरों में जलाया जाए। - ‘फूरकान’ अब भी है मौक़ा कि सँवर जाए दिल,
नाम-ए-रहमान से सीना ये सजाया जाए।
— Furkan S Khan
- तेरी यादों का सफ़र दिल में चला करता है,
ख़ामोशी ओढ़ के हर दर्द पला करता है। - हमने देखा है अँधेरों को भी रोशन होते,
जब तेरे नाम का इक दीप जला करता है। - दिल की दुनिया में अजब रंग भरे हैं तूने,
सूना मौसम भी यहाँ फूल खिला करता है। - तू न आए तो भी उम्मीद नहीं मरती है,
कोई वादा है जो हर रोज़ भला करता है। - लोग कहते हैं कि भूलो उसे अब आसानी से,
दिल कहाँ मानता है, फिर भी चला करता है। - ‘फूरकान’ अपने ही अश्कों से लिखी है ये ग़ज़ल,
दर्द काग़ज़ पे उतर कर भी हँसा करता है।
— Furkan S Khan
- दिल में कुछ टूट के ख़ामोश पड़ा रहता है,
कोई एहसास है जो रोज़ जगा रहता है। - तेरी आवाज़ की खुशबू नहीं जाती दिल से,
जैसे वीरान सा घर दीप जला रहता है। - हमने सीखा ही नहीं दर्द जताना अपना,
मुस्कुराहट का ही चेहरा तो सजा रहता है। - तेरे जाने से बदलती नहीं दुनिया लेकिन,
दिल के कोने में अँधेरा सा बसा रहता है। - वक़्त कहता है भुला दे उसे आसानी से,
दिल मगर बात पुरानी पे अड़ा रहता है। - ‘फूरकान’ लिखता है तन्हाई में हाल-ए-दिल को,
शेर बन जाए तो ये दर्द भला रहता है।
— Furkan S Khan
- तेरे आने की ख़बर दिल को सुनाई हमने,
फिर भी तन्हाई से हर शाम निभाई हमने। - दर्द चुपचाप था, आँखों से छलक ही जाता,
कितनी मुश्किल से मगर बात छुपाई हमने। - वक़्त ने हमको बहुत तोड़ दिया था लेकिन,
हौसलों की नई दीवार उठाई हमने। - तेरी यादों ने कई रात जगाए रखा,
नींद आई भी तो ख़्वाबों में बुलाई हमने। - लोग कहते हैं मोहब्बत में सुकूँ मिलता है,
ख़ुद ही बेचैनियाँ दिल में बसाई हमने। - ‘फूरकान’ अब भी उसी मोड़ पे ठहरा है दिल,
जहाँ पहली दफ़ा दुनिया भुलाई हमने।
— Furkan S Khan
- हमने चाहा था जिसे, वो हमारा न हुआ,
दिल तो रोया बहुत, पर गुज़ारा न हुआ। - उसकी बातों में अजब सा था सुकून पहले,
अब वही नाम भी दिल को गवारा न हुआ। - वक़्त ने छीन लिया हँसने का हर इक लम्हा,
ज़ख़्म ऐसा था कि फिर से वो किनारा न हुआ। - तू मिला भी तो बिछड़ने की खबर लेकर ही,
ऐसा मिलना भी किसी काम का सहारा न हुआ। - लोग कहते रहे सब ठीक हो जाएगा एक दिन,
दिन तो गुज़रा मगर दिल ये दोबारा न हुआ। - अब तन्हाई को ही अपना बना बैठे हैं,
कोई अपना भी मिला तो वो हमारा न हुआ। - 'फूरकान' लिखते रहे दर्द को चुपके-चुपके,
ये कलम भी कभी खुशियों का इशारा न हुआ।
— Furkan S Khan
- तेरे बाद कोई अपना सा लगा ही नहीं,
दिल को समझाया बहुत, पर ये माना ही नहीं। - रात भर जागते रहे तेरी यादों के साथ,
नींद आई भी तो आँखों में ठहरी ही नहीं। - तू बदल भी गया वक़्त की तरह चुपके से,
मैं बदलना भी चाहूँ तो बदल पाता ही नहीं। - लोग कहते हैं मोहब्बत में सुकून मिलता है,
हमने ढूँढा भी मगर कुछ भी मिला ही नहीं। - अब तन्हाई को ही किस्मत सा समझ बैठे हैं,
कोई दरवाज़ा ख़ुशी का फिर खुला ही नहीं। - 'फूरकान' लिखते रहे दर्द को अश्कों की तरह,
ये वो क़िस्सा है जो लफ़्ज़ों में ढला ही नहीं।
— Furkan S Khan
- तेरे जाने से कुछ टूटा सा लगता है यहाँ,
जैसे वीरान कोई कूचा सा लगता है यहाँ। - हमने हँसने की बहुत कोशिशें की हैं मगर,
दिल के अंदर कोई रोता सा लगता है यहाँ। - वक़्त बहता तो है दरिया की तरह आँखों से,
पर हर इक लम्हा ठहरता सा लगता है यहाँ। - तू नहीं है तो उजाले भी अधूरे से लगे,
चाँद भी खुद में सिमटता सा लगता है यहाँ। - कोई आवाज़ नहीं, फिर भी तेरी आहट है,
ये ख़ामोशी भी कुछ कहती सी लगती है यहाँ। - 'फूरकान' दिल ने छुपाए हैं हज़ारों किस्से,
हर एक शेर में वो बिखरा सा लगता है यहाँ।
— Furkan S Khan
- तेरी यादों का दिया दिल में जलाए बैठे हैं,
हम अँधेरों से भी रिश्ता सा बनाए बैठे हैं। - तू मिले या ना मिले ये तो मुक़द्दर की बात,
हम तेरे नाम की दुनिया ही बसाए बैठे हैं। - वक़्त ने छीन लिया हँसने का हर एक बहाना,
फिर भी होंठों पे हँसी झूठी सजाए बैठे हैं। - कोई समझे भी तो कैसे ये मोहब्बत का जुनूँ,
ख़ुद को ख़ुद ही से कई रोज़ छुपाए बैठे हैं। - लोग कहते हैं भुला दो उसे आसानी से,
हम तो मुश्किल को ही दिल से लगाए बैठे हैं। - रात तन्हा है मगर ख़्वाब तेरे जागते हैं,
चाँद को दिल की कहानी भी सुनाए बैठे हैं। - ‘फूरकान’ अपने ही अल्फ़ाज़ में उलझा है बहुत,
दर्द को शेर में ढालकर सुनाए बैठे हैं।
— Furkan S Khan
- हमने अब चाहने की भी आदत छोड़ दी है,
दिल ने खुद से ही ये इजाज़त छोड़ दी है। - वो जो हर ख़्वाब में ज़िंदा-सा रहता था,
आज उसकी भी तस्वीर हिफ़ाज़त छोड़ दी है। - हम थक गए हैं समझाते हुए इस दिल को,
कि उसने हर एक जिद, हर चाहत छोड़ दी है। - अब न शिकवा है किसी से, न कोई सवाल,
दर्द ने भी हमसे ये सियासत छोड़ दी है। - जो कभी टूटकर किसी का हुआ करता था,
उसने अब ख़ुद से भी मोहब्बत छोड़ दी है। - अगर कभी हमारा ज़िक्र आए कहीं,
कह देना—उसने बस ख़ामोशी ओढ़ ली है।
— Furkan S Khan
- दिल की ख़ामोशियों को ज़ुबाँ कौन देगा,
इस उजड़े शहर को फिर मकाँ कौन देगा। - रात ठहरी हुई है तेरे इंतज़ार में,
इस अँधेरी घड़ी को सवेराँ कौन देगा। - हमने हर दर्द हँसकर छुपाया मगर,
इन भीगी पलकों को आसमाँ कौन देगा। - तू मिला भी तो जैसे ख़्वाब टूट गया,
टूटे ख़्वाबों को फिर कारवाँ कौन देगा। - लोग कहते हैं सब वक़्त बदल देता है,
ज़ख़्म दिल के मगर ये निशाँ कौन देगा। - अब तो ख़ामोश रहना ही बेहतर लगा,
मेरी आवाज़ को फिर गूँजाँ कौन देगा। - 'फूरकान' लिखता रहा दर्द की दास्ताँ,
उसकी तन्हाइयों को जहाँ कौन देगा।
— Furkan S Khan
- अब किसी से भी दिल लगाने की हिम्मत नहीं रही,
जो बची थी थोड़ी-सी, वो भी क़िस्मत नहीं रही। - हम मुस्कुरा तो देते हैं, आदत के मुताबिक़,
अंदर मगर जीने की कोई चाहत नहीं रही। - जिसे हर दुआ में सबसे आगे रखा था,
आज उसी नाम की भी ज़रूरत नहीं रही। - हमने बहुत सँभाल कर रखा था खुद को,
मगर टूटने की भी अब शिकायत नहीं रही। - वो जो कहते थे “वक़्त सब ठीक कर देगा”,
अब वक़्त से भी कुछ ठीक करने की फ़ुर्सत नहीं रही। - अगर पूछे कोई हाल, तो बस इतना कहना,
ज़िंदा तो हैं अभी… मगर हालत नहीं रही।
— Furkan S Khan
- तेरी यादों का दिया आज भी जलता क्यों है,
दिल बुझाना भी चाहूँ तो मचलता क्यों है। - वक़्त कहता है भुला दूँ तुझे आसान सा,
नाम लेते ही मगर दिल ये पिघलता क्यों है। - मैंने हर मोड़ पे समझाया बहुत खुद को मगर,
तेरा चेहरा मेरी आँखों में निकलता क्यों है। - कोई रिश्ता भी नहीं, फिर भी अजीब सा है,
दूर रहकर भी तू दिल में संभलता क्यों है। - शाम तन्हा हो तो लगती है सज़ा जैसी,
दिन भले कट भी जाए, ये न ढलता क्यों है। - 'फूरकान' दिल ने मोहब्बत तो छुपाई लेकिन,
ज़िक्र उसका मेरी ग़ज़लों में निकलता क्यों है।
— Furkan S Khan
- हमने वक़्त से कभी जल्दी नहीं की तेरे लिए,
पूरी उम्र भी कम लगी, बस तेरे लिए। - तू आया नहीं, ये शिकायत भी कैसी,
हम रुके ही रहे थे हर मोड़ पे तेरे लिए। - दुआओं में माँगा नहीं तुझे ज़ोर देकर,
जो लिखा था मुक़द्दर ने, वही था तेरे लिए। - हमने ख़ुद को थकाया नहीं सवालों में कभी,
ख़ामोशी ही काफ़ी रही सब्र के लिए। - लोग कहते रहे, छोड़ क्यों नहीं देता,
कैसे कह देते कि ये दिल ही बना था तेरे लिए। - अगर मिल भी जाता तो क्या बदल जाता,
इंतज़ार ही मुकम्मल था उम्र के लिए।
— Furkan S Khan
- हम बोल सकते थे, मगर चुप रहना बेहतर लगा,
इस इश्क़ में शोर नहीं, सन्नाटा बेहतर लगा। - वो समझ जाता तो बात कुछ और होती,
न समझे जाने का हुनर भी बेहतर लगा। - हमने हर एहसास को सीने में ही रखा,
कह देने से ये बोझ भी बेहतर लगा। - नाम उसका दिल में रहा, ज़ुबाँ तक नहीं,
कुछ मोहब्बतों का छुपा रहना बेहतर लगा। - वो कभी जान न सका हमारी गहराई,
हमें भी गहराई में डूबना बेहतर लगा।
— Furkan S Khan
- हम हँसते रहे और दिल में मातम सा रहा,
भीड़ में भी हर क़दम तन्हा-सा रहा। - वो बात जो कहनी थी, कभी कह न सके,
इसी ख़ामोशी का बोझ उम्र भर रहा। - हमने चाहा बहुत कि उसे भूल जाएँ,
मगर हर ख्वाब उसी का पता-सा रहा। - उसके जाने के बाद कुछ बदला नहीं,
बस हर चीज़ में कुछ कम-कम सा रहा। - वक़्त ने ज़ख़्मों पर मरहम तो रख दिया,
दर्द तो गया नहीं, आदत-सा रहा। - हम टूटते रहे बिना आवाज़ किए,
और दुनिया को लगा सब ठीक-ठाक सा रहा।
— Furkan S Khan
- कुछ बातें अधूरी रह गईं, कहना भी मुश्किल था,
वो चुप रहा, मैं भी चुप रहा, मसला भी मुश्किल था। - हम साथ होकर भी तन्हा-से गुज़र जाते थे,
उसकी नज़रों में ठहरना कितना मुश्किल था। - हर रोज़ समझाया दिल को, भूल जा उसे,
हर रोज़ उसी बात को मानना मुश्किल था। - वो नाम जो होंठों पे आकर लौट गया अक्सर,
उसे आवाज़ देना भी कितना मुश्किल था। - हमने तो चाहा था बस थोड़ा-सा सुकून,
मगर इस शहर में सच्चा होना मुश्किल था। - अब उसकी याद भी आहिस्ता-सी आती है,
दर्द वही है, बस अब रोना मुश्किल था।
— Furkan S Khan
- हमने चाहा है तुझे, ये गुनाह नहीं माना,
जो मिला नहीं हमें, उसका मलाल नहीं माना। - तेरी ख़ुशी में ही अपनी दुआ ढूँढ ली हमने,
कभी तेरे न होने को सवाल नहीं माना। - हम रुके रहे वहीं, तू जहाँ से गुज़र गया,
इसमें भी किसी क़िस्मत का जाल नहीं माना। - तेरा ज़िक्र आया तो होंठों पे सुकून उतरा,
इस दर्द को हमने कोई बवाल नहीं माना। - तू अपना रहा किसी और की दुनिया में,
हमने इस सच को भी फ़िलहाल नहीं माना। - जो दिल में रहा, वही दिल तक ही सीमित रहा,
इज़हार न करना हमने कमाल नहीं माना।
— Furkan S Khan
- दिल ने फिर आज तुझे याद किया है चुपचाप,
दर्द ने सीने में फ़रियाद किया है चुपचाप। - तू नहीं है तो हर इक शय में कमी लगती है,
वक़्त ने ख़ुद को भी बर्बाद किया है चुपचाप। - लौट आए हों अगर ख़्वाब पुराने फिर से,
नींद ने आँखों को आबाद किया है चुपचाप। - हमने जो छोड़ दिया था किसी मोड़ पे कभी,
उम्र ने आज उसे याद किया है चुपचाप। - शोर इतना है ज़माने में कि सुनता ही नहीं,
इश्क़ ने दिल से सवालात किया है चुपचाप। - फ़ुरक़तों में भी तेरा ज़िक्र सुकूँ देता है,
तन्हाई ने बड़ा इजाद किया है चुपचाप।
— Furkan S Khan
- सफर की धूल में चेहरा वो पहचान में रहा,
वो था कहीं मेरे पास, पर जान में रहा। - हर एक बात में इक तन्हाई का साया था,
कभी तो ख्वाब में आया, कभी गुमान में रहा। - मुक़द्दर की सियाही को लिखा क्या जाए,
वो नाम बन के भी दिल के बयान में रहा। - नज़र झुकी तो लगा जैसे आसमां बोले,
"वो एक शख़्स ही तो मेरी उड़ान में रहा।" - मैं हँस पड़ा तो ये दुनिया हैरान रह गई,
कि ग़म भी क्या अजीब, मुस्कान में रहा।
— Furkan S Khan
- हर एक पल जो यहाँ आया है, गुज़र जाएगा
ये वक़्त है, किसी के लिए न ठहर पाएगा - न रख ग़ुरूर, न कर मायूस अपनी हालत पर
जो ग़म है आज, वो भी इक दिन सिमट जाएगा। - किनारे बैठ के मत देख इस भंवर को तू
ये दरिया है, अपनी मंज़िल को पहुँच जाएगा - ये शाम है तो ज़रूरी है कल सहर (सुबह) होगी
अँधेरा लाख गहरा हो, मगर छँट जाएगा - जो दौलत आज तेरी है, कल किसी और की
बस इक कफ़न ही है, जो तेरे साथ लिपट जाएगा - रिश्तों की डोर को इतना न कस के बाँध
ज़रा सी ठेस लगेगी, और टूट जाएगा - 'फुरकान' न छोड़ ये उम्मीद का दामन कभी
जो तेरा है, वो इक दिन तुझ तलक पलट जाएगा
— Furkan S Khan