तेरी हसरत में हर एक रात जलती रहती है,
दिल की बस्ती किसी शम्मा सी जलती रहती है।

तेरी आँखों की महक दिल में उतर जाती है,
एक खुशबू सी मेरे लफ़्ज़ों में पलती रहती है।

तू जो देखे तो ये दुनिया भी हसीं लगने लगे,
तेरी चाहत से हर उम्मीद मचलती रहती है।

मैं जो लिख दूं तेरा नाम अपने अशआरों में,
हर ग़ज़ल, हर नज़्म तुझमें ही ढलती रहती है।

तेरा जिक्र आये तो लब खामोश हो जाते हैं,
पर रुह के अंदर एक हलचल सी चलती रहती है।

शायरी का भावार्थ

यह शायरी इश्क़ की उस आग को बयां करती है जो खामोशी में भी जलती रहती है। शायर के लिए महबूब की हसरत सिर्फ़ याद नहीं, बल्कि एक ऐसी लौ है जो हर रात दिल की बस्ती को रौशन भी करती है और बेचैन भी।

आँखों की महक, लफ़्ज़ों की खुशबू और चाहत से मचलती उम्मीदें इस बात का संकेत हैं कि सच्ची मोहब्बत सिर्फ़ मुलाक़ातों में नहीं, बल्कि एहसासों में ज़िंदा रहती है।

शायरी का अंतिम भाव यह बताता है कि कभी-कभी लब खामोश हो जाते हैं, मगर रूह के भीतर मोहब्बत की हलचल रुकती नहीं।