यह सूफ़ी शायरी दिल के दर्द और ईश्वरीय प्रेम से मिलने वाली शांति पर आधारित है। 'बेताब' का अर्थ है बेचैन या अशांत, और 'जुस्तजू' का अर्थ है खोज या तलाश। यह कविता बताती है कि कैसे प्रेम की तलाश और ईश्वर में विलीन होने से भावनात्मक घाव भर जाते हैं और मन को शांति मिलती है।