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देशभक्ति की व्यथा: गद्दारी पर एक मार्मिक शायरी

Furkan S Khan की कलम से देशभक्ति और विश्वासघात के दर्द को बयां करती एक मार्मिक शायरी। जानें कैसे अपनों की गद्दारी देश प्रेम को आहत करती है।

Friday, September 25, 2026
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देशभक्ति की व्यथा: गद्दारी पर एक मार्मिक शायरी
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25 September 2026
देशभक्ति की व्यथा: गद्दारी पर एक मार्मिक शायरी
देशभक्ति शायरी
वतन की राहों में जो फूल बिछाए थे, अपनों के हाथों से काँटे क्यूँ पाए थे? वो अपने थे जो सीने से लगाए थे, पीठ में छुरा घोंप, दर्द क्यूँ दिए थे? जिनकी खातिर सरहद पर हम लड़े, उन्होंने ही वतन को ज़ख्म क्यूँ दिए? आँखों में आँसू, दिल में आग लिए, अपनों की इस बेवफ़ाई को कैसे सहे?
Kaafiya गए, सहे, रहे Radeef क्यों
F Poetry ByFurkan S Khan

यह देशभक्ति शायरी देश के प्रति प्रेम और विश्वासघात के गहरे दर्द को व्यक्त करती है। कवि उन अपनों की बेवफ़ाई पर सवाल उठा रहा है जिन्होंने देश को ही नुकसान पहुँचाया है। यह कविता उन लोगों को समर्पित है जो देश के लिए सब कुछ न्योछावर कर देते हैं, पर उन्हीं के बीच छिपे गद्दार उन्हें आहत करते हैं। यह उन घावों की पीड़ा है जो अपनों से मिलते हैं, और देश की रक्षा की भावना को ठेस पहुँचाते हैं।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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