यह दो पंक्तियों की शायरी 'इंतज़ार' के गहन भाव को बड़ी ख़ूबसूरती से व्यक्त करती है। इसमें प्रेमी के दिल की उस कसक को दर्शाया गया है, जब आँखें लगातार किसी अपने की राह तकती रहती हैं। पहले शेर में 'विरह' की आग और बेताबियों के 'राग' का ज़िक्र कर, दिल की तड़प को उजागर किया गया है। दूसरा शेर हर आहट में महबूब के आने का एहसास कराता है, जहाँ इंतज़ार की घड़ियाँ सिर्फ़ उसकी चाहत में गुम हैं। तीसरे शेर में मौसमों के गुज़र जाने के बावजूद उम्मीद के 'क़ायम' रहने की बात कही गई है, जो सच्चे प्रेम की अटूटता को दर्शाता है। आख़िरी शेर में वक़्त के 'विश्राम' लेने और दिल में महबूब के लौटने के अटूट विश्वास की बात है। यह शायरी न केवल इंतज़ार के दर्द को बयाँ करती है, बल्कि उसमें छिपी अटूट आस और प्रेम की गहराई को भी सामने लाती है, जो पाठकों के दिलों को छू जाएगी। यह एक ऐसी कविता है जो हर उस शख़्स से जुड़ती है जिसने कभी शिद्दत से किसी का इंतज़ार किया हो।
इंतज़ार: दिल की अनकही दास्तान | हिंदी शायरी
इस खूबसूरत दो पंक्तियों की शायरी में इंतज़ार की गहराई, विरह की पीड़ा और मिलन की अटूट आस को महसूस करें। दिल छू लेने वाली हिंदी कविता।