यह शायरी ईर्ष्या (जलन) की भावना को व्यक्त करती है। कवि अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है कि वह दूसरों की खुशी देखकर क्यों दुखी हो जाता है। यह एक आंतरिक संघर्ष है जहाँ खुशी के बजाय ईर्ष्या हावी हो जाती है।