गहराई का एहसास

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: अंधेरा, सवेरा  |  Radeef: है
खामोशी में डूबा दिल मेरा, हर पल है जैसे एक सवेरा। पर इस सवेरे में भी गहरा, इक उदासी का बसेरा है।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: अकेला, मेला  |  Radeef: है
राहें अधूरी सी लगतीं हैं, जैसे कोई न हो संग मेरा। भीड़ में भी मैं खुद को, एक तन्हा परिंदा पाता हूँ।

Nazm — By Furkan S Khan

Kaafiya: छाया, काया  |  Radeef: है
बीते पल की एक याद, जैसे मन पर छाई है। भूली बिसरी सी धुन, मेरे रूह की काया है।