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हम और ज़िंदगी
जीवन की किताब: फ़ुरकान एस खान की प्रेरणादायक नज़्म
फ़ुरकान एस खान द्वारा रचित 'जीवन की किताब' एक सुंदर नज़्म है जो ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव और हर पल में छिपी प्रेरणा को बयां करती है।
Nazm By Furkan S Khan
जीवन एक किताब है, हर पन्ना नया है
कभी खुशी का अफ़साना, कभी ग़म से भरा है
ये रिश्तों का संगम है, ये प्यार का दिया है
हर लम्हा एक इम्तिहाँ, हर पल जिया है
कभी धूप की तपिश है, कभी छाँव सुहानी है
ये वक़्त की धारा है, ये उम्र की निशानी है
गिर कर संभलना है, फिर उठना ज़रूरी है
यही तो है ज़िंदगी, हर साँस मज़बूरी है
Nazm By Furkan S Khan
ज़िंदगी एक सफरनामा, हर पल नया है
कभी धूप की तपिश है, कभी छाँव का साया है
ये रिश्तों का दरिया है, ये प्यार का संगम है
हर साँस में छुपा है, एक नया मौसम है
कभी हँसते हुए पल हैं, कभी आँख में नमी है
ये उम्मीदों की किरणें हैं, ये ज़िंदगी की कमी है
गिर कर संभलना है, फिर से आगे बढ़ना है
यही तो है जीवन, हर पल नया गढ़ना है
Nazm By Furkan S Khan
जीवन का सार है, हर पल जीना है
कभी धूप में जलना, कभी छाँव में सीना है
ये उम्मीदों का प्याला, इसे हर पल पीना है
हर साँस में एक नया, सपना बुनना है
कभी हँसी की गूँज है, कभी आँसू बहाना है
ये रिश्तों का दामन है, इसे थामे जाना है
गिर कर संभलना है, फिर से मुस्कुराना है
यही तो है ज़िंदगी, हर पल निभाना है
जीवन की किताब
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: नया, भरा | Radeef: है
जीवन एक किताब है, हर पन्ना नया है
कभी खुशी का अफ़साना, कभी ग़म से भरा है
ये रिश्तों का संगम है, ये प्यार का दिया है
हर लम्हा एक इम्तिहाँ, हर पल जिया है
कभी धूप की तपिश है, कभी छाँव सुहानी है
ये वक़्त की धारा है, ये उम्र की निशानी है
गिर कर संभलना है, फिर उठना ज़रूरी है
यही तो है ज़िंदगी, हर साँस मज़बूरी है
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: नया, साया | Radeef: है
ज़िंदगी एक सफरनामा, हर पल नया है
कभी धूप की तपिश है, कभी छाँव का साया है
ये रिश्तों का दरिया है, ये प्यार का संगम है
हर साँस में छुपा है, एक नया मौसम है
कभी हँसते हुए पल हैं, कभी आँख में नमी है
ये उम्मीदों की किरणें हैं, ये ज़िंदगी की कमी है
गिर कर संभलना है, फिर से आगे बढ़ना है
यही तो है जीवन, हर पल नया गढ़ना है
Nazm — By Furkan S Khan
Kaafiya: जीना, पीना | Radeef: है
जीवन का सार है, हर पल जीना है
कभी धूप में जलना, कभी छाँव में सीना है
ये उम्मीदों का प्याला, इसे हर पल पीना है
हर साँस में एक नया, सपना बुनना है
कभी हँसी की गूँज है, कभी आँसू बहाना है
ये रिश्तों का दामन है, इसे थामे जाना है
गिर कर संभलना है, फिर से मुस्कुराना है
यही तो है ज़िंदगी, हर पल निभाना है
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