ज़िंदगी की कहानी
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: कहती, रुलाती, चलती | Radeef: रही
ज़िंदगी एक कहानी सी कहती रही,
कभी हँसाती, कभी रुलाती रही।
रास्ते बदले, मंज़र भी बदले,
ये सिलसिला बस यूँ ही चलती रही।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: पहेली, सहेली, अकेली | Radeef: है
ज़िंदगी एक उलझी हुई पहेली है,
हर साँस में नई एक सहेली है।
कभी धूप है, कभी छाँव गहरी,
ये तो बस चलती रहती अकेली है।
Shayari — By Furkan S Khan
Kaafiya: जी लो, ले लो, मुस्कुराते | Radeef: चलो
ज़िंदगी के हर पल को जी लो चलो,
जो भी मिले, उसे खुशी से ले लो चलो।
गम भी आएंगे, खुशी भी आएगी,
हर राह पर मुस्कुराते चलो।